​पुरानीबस्ती पर प्रकाशित सभी ख़बरें सिर्फ अफवाह हैं, किसी भी कुत्ते और बिल्ली से इसका संबंध मात्र एक संयोग माना जाएगा। इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। इसे लिखते समय किसी भी उड़ते हुए पंक्षी को बीट करने से नहीं रोका गया है। यह मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है। यदि आप यहाँ प्रकाशित किसी लेख/व्यंग्य/ख़बर/कविता से आहत होते हैं तो इसे अपने ट्विटर & फेसबुक अकाउंट पर शेयर करें और अन्य लोगों को भी आहत होने का मौका दें।

कविता / नज्म

चाँद भी कंबल ओढ़े निकला था,सितारे ठिठुर रहें थे, सर्दी बढ़ रही थी, ठंड से बचने के लिए, मुझे भी कुछ रिश्ते जलाने पड़े।
काव्यका पुरानी बस्ती का एक अहम हिस्सा है, बिना काव्यका के पुरानी बस्ती कुछ सुनसान सी होती।

आपका प्यारा
काव्यका का राहगीर