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लालसा : प्यार का आलिंगन या मौत का फंदा

लालसा : प्यार का आलिंगन या मौत का फंदा
इंस्पेक्टर साहब के थप्पड़ लगाते ही, संगम अपनी कल्पना की गलियों से बाहर निकलकर यथार्त में आ गया। जहाँ ना तो कावेरी की सुंदरता थी और ना ही नर्मदा की कातिल मदहोश कर देनेवाली आँखें। यहाँ तक कि उसे जमुना के अप्सरा अवतार का भी ध्यान नहीं रहा।

दीवार पर टंगी पेंटिंग को देखकर उसे याद आया कि उसने कैसे चेनाब और भार्गवी के के सुर्ख लाल खून के रंग से उस पेंटिंग को जीवित किया था। जो दीवार पर सजीव दिख रही थी।

अपनी ही कलाई से बहते खून को देखकर, संगम को लगा कि वो एक स्वपन में है। तभी उसे  एक के बाद एक लॉन से निकलती, लाशों का ध्यान हुआ। एम्बुलेंस के अंदर लेटे - लेटे, सड़क पर दोनों तरफ दिखते अमरुद के पेड़ और सुनहरी मूर्तियों ने उसकी कल्पना को जीवित कर दिया।

अब आप इसे संगम की कल्पना मानते हैं या सच?

कमल उपाध्याय का पहला उपन्यास क्राइम, सस्पेंस, थ्रिलर और कामुकता का एक संगम है। जहाँ हर पल कुछ ऐसा घटित होता है, जिसकी कल्पना पाठक नहीं कर पाता है। उपन्यास अपने लॉन्च के पहले दिन ही टॉप चार्ट्स पर जाकर बैठ गया है। आप भी एक बार जरूर पढ़ें। 

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