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#व्यंग्य - मिलावट कानून ख़ारिज

एक अहम फैसले में सरकार ने खाने - पीने के सामन में मिलावट को लेकर बनें कानून को खारिज कर दिया।
सरकार का मानना है कि इस तरह का कड़ा कानून बनाने से समाज के हर तबके को नुकसान हो रहा है। उदाहरण के लिए मिलावट खोर अब मिलावट नहीं कर पा रहा जिससे उनका मुनाफा कम हो रहा है और उन्हें ना चाहते हुए भी कई लोगों को काम पर से निकालना पड़ा जिसके चलते समाज में बेरोजगारी बढ़ रही है।
खाद्य मंत्री का मानना है कि पुलिस अब मिलावट खोरो के साथ मिलकर पैसा नहीं कमा पा रही इसलिए पुलिसवालों ने आम जनता को परेशान करके पैसा कमाना शुरू कर दिया है। जिससे सिग्नल तोड़ने पर सौ रुपये देने के बदले जनता को दो सौ रुपये देने पड़ रहें हैं। दूसरी तरफ जनता को भी कभी तीन सौ रुपए किलो मिलनेवाली खोए की मिठाई अब मिलावट ना होने के कारण छह सौ रुपए में मिल रही है।
नेताजी का हाल तो सबसे बुरा है। मिलावटखोर अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा नेताजी के चुनावी चंदे में देते थे लेकिन जब से मिलावट कानून आया है, मिलावटखोरों का धंधा चौपट हो गया तो नेताजी का चंदा भी बंद हो गया। यदि नेताजी का चंदा बंद हो गया तो आम जनता को चुनाव प्रचार के समय शराब और पैसा मिलना बंद हो जायेगा। 
सरकार का मानना है कि कानून का निर्माण समाज के कल्याण के लिए होता है और मिलावट कानून से समाज को सिर्फ नुकसान पहुंच रहा है इसलिए सरकार को जनता के लाभ के लिए मिलकवट कानून को खारिज करना पड़ा। जिसके लिए सरकार जनता से क्षमा चाहती है।

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