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#व्यंग्य - जाम से बचने के लिए गाँधी सेतु अब बना भगत सिंह कल्याण पुल

जब पटना शहर, शहर नहीं था तब वहाँ से बहने वाली एक नदी को पार करने के लिए एक अंग्रेजी अधिकारी ने उसपर पुल का निर्माण करवाया। मोटर गाड़ियां तब कम थी, यह कहना ठीक होगा कि ना के बराबर थी इसलिए यातायात में किसी भी तरह की असुविधा नहीं होती थी।

नदी के किनारे रहनेवालों के लिए पुल बनना उस सपनें की तरह था जहाँ छान उठाकर रखने के लिए क्रेन आ जाए और गुड़ की भेली का एक भी टुकड़ा किसी को ना देना पड़े।

१९४७ में भारत स्वतंत्र हो गया। कुछ नेता स्वतंत्रता के बाद भारत निर्माण
के कार्य में जुट गए और कुछ नेता भारत में जो कुछ पिछले समय में निर्माण
हो चुका था उसका नामकरण करने में जुट गए। भारत में इतने महात्मा गांधी
मार्ग रातों-रातों टिम टिमाने लगे कि डाकिया चाँद की चिट्ठी सूरज के घर
लेकर पहुंच जाता था।

नामकरण की प्रक्रिया में फलाना नदी पर बने सेतु का नाम गाँधी सेतु रख
दिया गया। १९४७ से २०१६ आते - आते गाड़ियों की धक्कम - पेल इतनी बढ़ गई कि
कभी - कभी तो लगता था गाँधी जी स्वयं पुल को बड़ा करने के लिए पुनर्जन्म
लेकर फिर से सत्याग्रह ना कर दे लेकिन नेता इस पुल और यातायात व्यवस्था
को लेकर एक भी बार चिंतित नहीं दिखे। लोकतंत्र में नेता का चिंतित दिखना
जरुरी होता है।

चिल्हरु कुमार एक दिन गाँधी सेतु पर लगे जाम में अटक गए। अटके - अटके
क्या करते? मोबाइल निकाला और गाँधी सेतु के जाम पर हैशटैग लगाकर ट्वीट पर
ट्वीट दंदनाने लगें। मंत्री साहब के एक चेले ने ट्विटर पर गांधी सेतु के
विवाद के बारे में मंत्री जी को सूचित किया।

मौर्या पाँच सितारा होटल में गांधी सेतु की व्यवस्था पर चर्चा के लिए
मंत्री साहब अपने संत्री के साथ पहुँच गए। पी डब्ल्यू डी विभाग के
अधिकारी ने कहा कि बिना घुसपुताई के नया और चौड़ा पुल दो साल में निर्माण
किया जा सकता है। मंत्री जी ने चिंता दिखाते हुए कहा कि बिना घुसपुताई
के कोई काम करना जनता के आत्मविश्वास को तोड़ना होगा। पी डब्ल्यू डी विभाग
के अधिकारी ने घुसपुताई के साथ पुल का निर्माण करने के लिए पाँच साल का
समय माँगा।

चिल्हरु कुमार अपना हैशटैग ट्विटर पर ट्रेंड करवाने में सफल हो गए।
नेताजी हैशटैग देखकर चिंतित हो गए। उन्हें देखकर उनके संत्री से लेकर
दरबान तक चिंतित दिखने लगे। नेताजी चिंतित थे कि पांच साल के पहले पुल की
यातायात व्यवस्था को किस तरह ठीक किया जाए?

नेता जी के खुरापाती साले ने नेताजी को एक दम लल्लन टाप आयडिया टीप दिया।
आज कल देशभक्ति में गाँधी जी का नाम थोड़ा लड़खड़ा रहा था और शहीद भगत सिंह
का नाम ऊपर जा रहा था। नेताजी ने पुल का नाम गाँधी सेतु से बदलकर शहीद
भगत सिंह कल्याण पुल रख दिया।

नेताजी के चाटुकारों ने ट्विटर पर घोषित कर दिया कि जिस भगत सिंह ने अपनी
जिंदगी को देश की स्वतंत्रता के लिए न्यौछावर कर दिया उनके नाम वाले पुल
पर यदि आप थोड़ी असुविधा नहीं सहन कर सकते तो आपको भारतीय कहलाने का कोई
हक़ नहीं है और आप देशद्रोही हैं।

चिल्हरु कुमार अभी भी जाम में अटके रहते हैं लेकिन जाम पर ट्वीट करना छोड़
दिया। डरते हैं कि कहीं किसी दिन कोई पहचान लेगा तो देशभक्ति का चलान भी
कटेगा और जान-माल का नुकसान भी सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता है।

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