​पुरानीबस्ती पर प्रकाशित सभी ख़बरें सिर्फ अफवाह हैं, किसी भी कुत्ते और बिल्ली से इसका संबंध मात्र एक संयोग माना जाएगा। इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। इसे लिखते समय किसी भी उड़ते हुए पंक्षी को बीट करने से नहीं रोका गया है। यह मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है। यदि आप यहाँ प्रकाशित किसी लेख/व्यंग्य/ख़बर/कविता से आहत होते हैं तो इसे अपने ट्विटर & फेसबुक अकाउंट पर शेयर करें और अन्य लोगों को भी आहत होने का मौका दें।

#कविता - अल्फ़ाजों में खोई नज्म

नज्म एक लिखी,
कई बार मिटाई,
सारे अल्फ़ाज़ हैं परेशान,
पूछते हैं,
क्या लिखना चाहते हो शायर?

अब क्या बताऊँ उन्हें,
अपने मिश्रे सुलझा रहा हूँ,
लिखकर मिटाना नही आता मुझे,
मिटाकर अल्फ़ाजों के दाब बना रहा हूँ,

वो नज्म जो 
उस रात सपने में आई थी,
अल्फ़ाज़ों से लबरेज थी
और लज्जत ऐसी जैसे पान में लगा किमाम।

खो गई है नज्म मेरी,
अल्फ़ाज़ों ने उसे घेर रखा है,
मैं तो इतना कहूँगा बस,
सुनो अल्फ़ाज़ों जो परेशान हो तो,
लौटा दो मुझे मेरी नज्म।



टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें