​पुरानीबस्ती पर प्रकाशित सभी ख़बरें सिर्फ अफवाह हैं, किसी भी कुत्ते और बिल्ली से इसका संबंध मात्र एक संयोग माना जाएगा। इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। इसे लिखते समय किसी भी उड़ते हुए पंक्षी को बीट करने से नहीं रोका गया है। यह मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है। यदि आप यहाँ प्रकाशित किसी लेख/व्यंग्य/ख़बर/कविता से आहत होते हैं तो इसे अपने ट्विटर & फेसबुक अकाउंट पर शेयर करें और अन्य लोगों को भी आहत होने का मौका दें।

#कविता - नज्म जगा गई

कल रात एक नज्म जगा गई थी,
कहती है शायर अब मेरी जानिब नही आते,
वो जो बिछौना पुराना छोड़ गए थे,
अब उसके चिथड़े  होने लगे हैं,

तुम्हारी यादों की कतरन से,
एक बेना बनाया है,
ठंड हो तो भी उसे डोलाकर,
सर्द होती है।

याद आती है तुम्हारी,
वो आधी रातों को जगकर,
तुम्हारा मुझसे गुफ्तगू करना,
मुझे गुदगुदा कर जगाये रखना।

एक डेबरी जो तुम जलाते थे,
स्याह रातों में,
बिना जले उसकी बाती,
अब घटने लगी है।

चले आओ शायर,
के अब कुछ दिन की जिंदगानी हैं,
एक बार देख लू तुम्हें,
तो अपने मर्कज की तरफ बढ़ू।




टिप्पणियाँ

  1. तुम्हारी यादों की कतरन से,
    एक बेना बनाया है,
    ठंड हो तो भी उसे डोलाकर,
    सर्द होती है।

    बहुत अच्छी लगी यह पंक्तियाँ।

    उत्तर देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें