​पुरानीबस्ती पर प्रकाशित सभी ख़बरें सिर्फ अफवाह हैं, किसी भी कुत्ते और बिल्ली से इसका संबंध मात्र एक संयोग माना जाएगा। इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। इसे लिखते समय किसी भी उड़ते हुए पंक्षी को बीट करने से नहीं रोका गया है। यह मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है। यदि आप यहाँ प्रकाशित किसी लेख/व्यंग्य/ख़बर/कविता से आहत होते हैं तो इसे अपने ट्विटर & फेसबुक अकाउंट पर शेयर करें और अन्य लोगों को भी आहत होने का मौका दें।

#कविता - कुछ पल अंधेरों का देते हैं

उजाले तो हर कोई 
अजुरी भरखकर रख लेता है,
आओ मेरे साथ 
कुछ पल अंधेरों का देते हैं।

काली स्याही फेंककर 
कुछ उजली रातों को चमकाया है,
सितारों से कहा 
तुम कुछ देर के लिये टिमटिमाना बंद करो,

चाँद की छुट्टी तो पहले ही कर दी थी,
अभी देर है सूरज को निकलकर 
प्रकाश का कोलाहल करने में,

आओ मेरे साथ 
कुछ पल अंधेरों का देते हैं,

गिनकर तारे सर्द रातों में,

उँगलियाँ जो जल गई थी,
आज उन्हें मरहम
अंधेरे का लगा देते हैं।

कुछ खयालात हैं,
कुछ खयालात हैं,
जो अंधेरे के सर्द होने पर,
आकर बैठते हैं मेरे पास,
मुझसे गुफ्तगू करतें हैं।

आओ मेरे साथ 
कुछ पल अंधेरों का देते हैं,



2 टिप्‍पणियां: