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#कविता - मेरी प्यास बड़ी है

गर्मी के दिन है, पंक्षी प्यासे है ,
भटक रहे है इस डाल से उस डाल  !

इंसान हु मै, मेरी प्यास बड़ी है ,
प्यास है मुझे सोहरत की ,

इंसान हु मै, मेरी प्यास बड़ी है ,
प्यास है मुझे नाम, मनमानी  की ,

इंसान हु मै, मेरी प्यास बड़ी है ,
प्यास है मुझे घर, गाड़ी, साकी की ,

प्यास नहीं बुझेगी मेरी पानी से ,
पंक्षी पानी से प्यास बुझाते है  !

इंसान हु मै, मेरी प्यास बड़ी है ,
सात समन्दर फिरने की प्यास  !

इंसान हु मै, मेरी प्यास बड़ी है ,
लोगो को नीचा दिखने की प्यास  !

इंसान हु मै, मेरी प्यास बड़ी है ,
दौड़ के भीड़ से आगे निकल जाने की प्यास  !

गर्मी के दिन है, पंक्षी प्यासे है ,
भटक रहे है इस डाल से उस डाल  !

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