​पुरानीबस्ती पर प्रकाशित सभी ख़बरें सिर्फ अफवाह हैं, किसी भी कुत्ते और बिल्ली से इसका संबंध मात्र एक संयोग माना जाएगा। इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। इसे लिखते समय किसी भी उड़ते हुए पंक्षी को बीट करने से नहीं रोका गया है। यह मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है। यदि आप यहाँ प्रकाशित किसी लेख/व्यंग्य/ख़बर/कविता से आहत होते हैं तो इसे अपने ट्विटर & फेसबुक अकाउंट पर शेयर करें और अन्य लोगों को भी आहत होने का मौका दें।

#व्यंग्य - जलेबियों से बंटा #JNU

पिछले कुछ दिनों से #JNU देशभक्ति और देशद्रोही बातों को लेकर खबरों में बना हुआ है। वैसे जिस नाम में जवाहरलाल नेहरु जुड़ा हो वो तो हमेशा से खबरों और विवादों में बना रहता है। यह मैंने बोल दिया है लेकिन मेरे कार्यक्रम के निर्माता इस बात को एडिट कर देंगे क्योंकि नेहरू की आलोचना करना या उनके खिलाफ बोलना हमारे चैनल की एचआर पॅालिसी  के खिलाफ हैं।  

#JNU में चल रहा सारा विवाद जलेबियों को लेकर है। ABVP का मानना है कि जलेबियाँ विदेशी खाद्य हैं जो मुगलों के साथ भारत आई। इसलिए हम जलेबियों को अपनी सभ्यता में और अंदर तक दाखिल नही कर सकते हैं।

वही दूसरी तरफ कन्हैया और उमर खालिद सुबह सुबह उठकर दूध जलेबियों का सेवन करतें हैं, उमर खालिद के पिताजी भी जलेबियों के बड़े शौकीन थे इसलिए उन्होंने भी उमर खालिद का इस मुद्दे पर समर्थन किया है लेकिन उमर खालिद के पिताजी ने मधुमेह रोग के चलते अब जलेबियाँ खाना छोड़ दी है परंतु उन्होंने जलेबियाँ खाना व्यक्ति की आजादी और स्वतंत्रता का हक बताया है।

ABVP वाले भी अपने प्रदर्शन के बाद मुंबई के प्रसिद्ध हलवाई तेवारी बंधु की जलेबियाँ खाते हुए अपने दल के एक सदस्य को डांट रहें थे कि इतने दिन के बाद मुंबई से आया तो थोड़ा अधिक जलेबियाँ नही ला सकता था क्या? यदि उन्हें भी जलेबियाँ पसंद है तो जलेबियों का विवाद क्या एक राजनैतिक साजिश है? इससे भारत की बदनामी नही होगी क्या?

समाचार चैनलों ने भी अलग अलग तरीके से #JNU में उठे इस जलेबी विवाद को अपने अपने तरीके से उठाया है। मशहूर पत्रकार राजदीप परदेसाई ने कहा की सभी को जलेबियाँ खाकर मधुमेह से मरने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए। मोदीजी ने जिस तरह गुजरात में जलेबियाँ बंद करवा दी थी ठीक उसी तर्ज पर वो ABVP के कंधे पर बंदूक रखकर चला रहें हैं। वही एक मोहतरमा पत्रकार राना अय्युब का कहना है की जलेबियों का विवाद करके अमित शाह जलेबियों को विदेशियों को बेचकर पैसा कमाना चाहते हैं।

जलेबियों के इस संग्राम में भारत की बदनामी नही होगी क्या?

चलता हूँ आप भी चलते रहिए क्योंकि अगर आप लोग रुकेगा तो आपको जलेबियाँ नही मिलेंगी।

टिप्पणियाँ