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#व्यंग्य - रब्बीश की रिपोर्ट - आयरनी की मृत्यु

प्राइम टाइम, रात ९ बजे 

नमस्कार मैं हूँ रब्बीस कुमार और आप देख रहें हैं प्राइम टाइम...मैं आप लोगो से टीवी काम देखने के बारे में  थक गया लेकिन  आप लोग मेरी बात नहीं मानते हैं, मैं तो स्वयं अपना कार्यक्रम कभी भी नही देखता हूँ, यदि  पेट  भरने की मजबूरी ना होती तो कब का इस कार्यक्रम को छोड़ चुका होता। 

आज मैं आपको एक सनसनीखेज खबर के बारे में बता रहा हूँ जिससे भारत की बदनामी नही हो सकती है

हाल ही के दिनों में एक बात जो सोशल मीडिया पर बार बार दुहराई जा रही थी वो है आयरनी की मौत। लोगों की बातों से तो ये लग रहा था की आयरनी ने आत्महत्या कर ली है। लेकिन आयरनी के आत्महत्या करने के कारण अलग अलग थे जैसे किसी राडिया टेप पर पकड़े गए पत्रकार मोहतरमा का लोगों को ईमानदारी पर ज्ञान देना, लालू जी का घोटाले से होने वाले सरकारी नुकसान की बात करना या जिहादी मुसलमानों से शांति के पैगाम के बारे में सुनना।

मैं आपको बता देना चाहता हूँ की वीडियो में ये अँधेरा कोई तकनिकी खरबी नहीं है। मैंने और मेरे निर्माता ने TRP बटोरने के लिए ये नया पैतरा अपनाया हैं। 

मैने भी कमर कस ली की वो आयरनी की मृत्यु का राज जानकर रहूँगा। अपने कैमरा मैन को लेकर मैं पुरानीबस्ती में आयरनी की मृत्यु की तहकीकात करने निकल गया। 


पुरानीबस्ती में घूमते समय मैं ने एक घर से मय्यत निकलते देखा तो मुझे लगा आयरनी की मय्यत हो सकती है। मैं झठ से वहाँ पहुँच गया और माईक पर एक व्यक्ति को पूछने लगे की जिस व्यक्ति की मृत्यु हुई वो कौन है और उनकी मृत्यु पर आप को कैसा लग रहा है? सामने वाले बुजुर्ग मोहतरम ने रुआसी हुई आवाज में कहा, "ये मेरा एकलौता बेटा कैप्टन पवन कुमार है, कल कश्मीर में आतंकवादी मुठभेड़ में यह शहीद हो गया, मुझे देश के ऊपर मेरे बेटे की कुरबानी पर गर्व है।

कैप्टन पवन कुमार की मय्यत से मुझे टीरपी मिलने की कोई उम्मीद ना लगी, मैं बहुत निराश हुआ और आयरनी की सनसनीखेज खबर के लिए आगे बढ़ गया। कुछ ४०० मीटर चलने के बाद मुझे एक मय्यत और दिखाई दी। मय्यत के चारो तरफ ३-४ छोटे बच्चे बहुत जोर जोर से रो रहें थे। एक औरत जोर जोर से रो रही थी मैंने अंदाज लगाया कि ये मृत व्यक्ति की बेवा होगी। मैंने उनसे सवाल जवाब किया तो पता चला वो कोई भला समाजसेवक था परंतु कल कुछ बदमाशों ने कट्टे से गोली मार दी क्योंकि वो एक लोकल बम बनाने वाले गिरोह का पर्दफास करने वाले थे जो लोकल नेताओं को चुनाव के समय बम-हथियार बनाकर देते थे।

मुझे इस खबर से भी टीआरपी की कोई सुगंध नही आई। रात को मुझे प्रोपगेंडा, माफ करना प्राइम टाइम करना था। लेकिन मेरी तहकीकात में अभी तक कुछ भी नही पता चला था। तभी मेरे मोबाइल पर अचानक से रिंगटोन बजी,"बेच देंगे, बेच देंगे ईमान बेच देंगे, समाजवाद लाने का पैगाम आय फोन से देंगे।" प्राइम टाइम कार्यक्रम के निर्माता का फोन था। अगली तरफ की आवाज ने कुछ कहा तो मैंने कहा,हाँ सर, शाम को रिपोर्ट पेश करता हूँ। जो इस प्रकार है।

कुछ ही दिन पहले सोशल मीडिया पर आयरनी के मरने की खबर जोर शोर से उछाली गई। मैं ने भी टीआरपी के चक्कर में एसी कमरे से निकलकर कुछ तहकीकात करने के बारे में सोचा। आखिर एक बिका हुआ पत्रकार एक चोर नेता पैदा करता है तो मैं अपने काम पर निकल गया। चोर नेता पैदा करने नही। बल्कि तहकीकात करने।

आप लोगों को सुनकर हैरत होगी की हमें आयरनी के मरने का कोई नामो निशान तक नही मिला। लोग सरकार से इतने डरे हुए हैं की कोई भी आयरनी की मृत्यु का जिक्र नही करना चाहता है।मैंने कई लोगों से आयरनी की जात पता करने की कोशिश की लेकिन कोई भी आयरनी की मृत्यु के बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नही है। आयरनी की मृत्यु पर लोग भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव से डरे हुए हैं।

प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर चुप हैं इससे देश की बदनामी नही होगी क्या? 

गृहमंत्री इस मुद्दे पर चुप हैं इससे देश की बदनामी नही होगी क्या?

आयरनी की मृत्यु की सच्चाई का विरोध करने के लिए कल हम सब बड़े पत्रकार इंडिया गेट तक अपनी बड़ी बड़ी कार में पहुंचेंगे और वहाँ से आँखों पर बड़े बड़े रे बेन के चश्मे लगाकर राष्ट्रपति भवन तक जाएंगे। हम अपनी पद यात्रा से यह बात साबित कर देंगे की आयरनी की मृत्यु केंद्र सरकार की लापरवाही है।

आज का प्राइम टाइम यही समाप्त होता है। मैं चलता हूँ और आप भी चलते रहिए। नमस्कार।

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