​पुरानीबस्ती पर प्रकाशित सभी ख़बरें सिर्फ अफवाह हैं, किसी भी कुत्ते और बिल्ली से इसका संबंध मात्र एक संयोग माना जाएगा। इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। इसे लिखते समय किसी भी उड़ते हुए पंक्षी को बीट करने से नहीं रोका गया है। यह मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है। यदि आप यहाँ प्रकाशित किसी लेख/व्यंग्य/ख़बर/कविता से आहत होते हैं तो इसे अपने ट्विटर & फेसबुक अकाउंट पर शेयर करें और अन्य लोगों को भी आहत होने का मौका दें।

#कविता - चलो फिर एक नया मजहब बनाए

चलो फिर एक नया मजहब बनाए, 
कुछ और लोगों को बांटे आपस में,
बढ़ाएं रंजिशें उनकी,
उकसाएं लोगों को कत्लेआम के लिए,
कुछ मरेंगे,
कुछ लहूलुहान होंगे,
चिंगारी जलती रहेगी,
पीढ़ी दर पीढ़ी,
एक दूसरे को नीचा दिखाने की
। 

कुछ और खुदगर्ज कूद पड़ेंगे,
इस रंजिश के खेल में,
सेकेंगे रोटियां,
मय्यत की चिंगारी पर,
आग बुझ गई तो,
मजार के 

​दीये
 से फिर जला देंगे,
जलाकर घर हमारा,
अपना महल रोशन करेंगे।

बीत जाएँगी कई पीढ़िया,
भूल जाएँगी कारण आपसी लड़ाई का,
धर्म गुरु फिर उठेंगे,
सीख देंगे धर्म रक्षा का,
कहेंगे लड़ मरो,
अपने धर्म के लिए,
लेकिन
कभी स्वयं धर्म की रक्षा के लिए लड़ने ना आएंगे।


चलो फिर एक नया मजहब बनाए, 
कुछ और लोगों को बांटे आपस में। 


आपकी टिप्पणी हमारे लिए भारतरत्न से भी बढ़कर है इसलिए टिप्पणी कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें। 
हर सोमवार/गुरुवार  हम आपसे एक नया व्यंग्य/कविता लेकर मिलेंगे।  ​

10 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बखूबी से आज के दुनिया को दिखाया गया है...

    कुछ ऐसी ही यह भी है..
    अजीब सी धुन बजा रखी है
    जिंदगी ने मेरे कानों में,
    कहाँ मिलता है चैन
    पत्थर के इन मकानों में,

    बहुत कोशिश करते हैं
    जो खुद का वजूद बनाने की.......
    ...
    www.apratimblog.com

    उत्तर देंहटाएं
  2. उकसाएं लोगों को कत्लेआम के लिए,
    कुछ मरेंगे,
    कुछ लहूलुहान होंगे,

    मर्मस्पर्शी ....बहुत गहरी पंक्तियाँ :)

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत भावपूर्ण और बेहतरीन रचना.....बहुत बहुत बधाई.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. "बीत जाएँगी कई पीढ़िया,
    भूल जाएँगी कारण आपसी लड़ाई का"

    काफ़ी सटीक! जियो !

    उत्तर देंहटाएं