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#व्यंग्य - शेखचील्ली का ई-कॅामर्स

पनीर चिल्ली के तर्ज पर शेखचील्ली नाम को कोई खाने का व्यंजन मत समझ लेना। शेखचील्ली साहब हमारी पुरानी दंतकथाओं में यहां वहां देखने को मिल जाते हैं। शेखचील्ली साहब को दिन में सपने देखने कि आदत थी और अपनी इस बीमारी के कारण ही उनपर तरह तरह की कहानिया लिखी गई, उस समय तो इस आदत को बीमारी के रूप में देखा जाता था लेकिन इंटरनेट के युग में ये एक कला बनकर उभरा है।

एक बार शेखचील्ली साहब खाली बैठे थे। एक सेठ ने उनसे आकर कहा कि यदि तुम मेरी ये घी की मटकी यहाँ से उठाकर इसके गंतव्य तक पहुंचा दोगे तो मैं तुम्हें एक सोने की मुहर दूंगा। शेखचील्ली ने सेठ की बात झटपट मान ली और घी की मटकी उठाकर सेठ के पीछे पीछे चल दिये।

शेखचील्ली साहब घी की मटकी सिर पे रखकर कदम बढ़ाते जा रहे थे और अपने सोने की मोहर के सपने में खो गए। शेखचील्ली ने प्लान बनाया कि इस मोहर से घास खरीदकर उसे बाजार में बेचकर उससे एक बकरी खरीद कर उसका दूध बेचकर कई बकरीया खरीद लूंगा। फिर सारी बकरीयो को बेचकर भैंस खरीद लूंगा और धीरे - धीरे घोड़,हाथी और महल का मलिक बन जाऊँगा।

शेखचील्ली साहब अपने सपने खोते ही जा रहे थे कि अचानक से एक पेड़ टहनी से टकराकर मटकी जमीन पर गिर गई। शेखचील्ली साहब सपने से बाहर आये तो औकात एक कौड़ी की भी नही बची थी और सेठ जोर जोर से शेखचील्ली को चिल्ला रहा था।

शेखचील्ली साहब के सपने देखने की कला को अब ई-कॅामर्स के नाम से जानते हैं। आज कल भारत मे IIT और IIM से निकलनेवाला हर व्यक्ति ई-कॅामर्स डालना चाहता है। यहाँ पूरा मॅाडल शेखचील्ली के सपनों पर आधारित है। व्यापार में मुनाफा भाई की फिल्मों की कहानियों की तरह दूर दूर तक लापता है।

कैश डिस्काउंटेड मैथड से भविष्य में होने वाले लाभपर वैल्युशेन हो रहा है। भविष्य में ग्राहक बढ़ेंगे और इंटरनेट युजर बढ़ेंगे तो ई-कॅामर्स से सोना निकलेगा। इनवेस्टर भी सस्ते दाम में शेयर खरीदकर शेखचील्ली के ई-कॅामर्स के सपने को पॉवर पॅाइंट पर प्रेजेंट करके अपने से बड़े वाले इनवेस्टर को बेच रहा है। अंत में एक मुर्ख बचेगा जिसकी मटकी फूट जाएगी और कुछ नही मिलेगा।

वैसे देखा जाए तो पुरानी बस्ती का भी करोड़ रुपये का वैल्युएशन है अब सिर्फ पैसा कमाने का रास्ता ढूंढना है और एक शेखचील्ली जिसे मैं इसे बेच सकू।

टिप्पणियाँ

  1. बहुत खूब लिखा है महोदय। हर इंसान शेखचिल्ली बना घूम रहा है आजकल। वर्तमान में उसके पास जो है, उसको सम्भाले बिना !

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