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#व्यंग्य - अच्छे दिन

सत्ता परिवर्तन से यदि कुछ बदला है तो वो है नेताओं का नसीब। इसके अलावा कुछ उस तरह से नहीं बदला जिस तरह से नेताजी की चल-अचल संपत्ति बढ़ी। ऐसा नहीं है की सभी नेता गैर क़ानूनी तरीके से पैसा बनाते हैं। मैं बहुत से ऐसे नेताओ को जानता हूँ जिन्होंने क़ानूनी रूप से लेकिन नैतिकता को दर किनारा करते हुए पैसे बनायें, जैसा की मैंने पहले ही कहा की सत्ता परिवर्तन से सिर्फ नेताओं का नसीब बदलता हैं। धीरे-धीरे दिन महीने में और महीने साल में पूरे हो गए। मोदी जी की सरकार को एक साल हो गया लेकिन कुछ लोग कहते है कहा हैं अच्छे दिन? हमारे पत्रकार तोताराम भी लोगो के बीच अपना माइक लेकर अच्छे दिन की जाँच पड़ताल करने के लिए निकल पड़े। पत्रकार तोताराम को तो आप जानते ही होंगे? उनके जैसा होनहार पत्रकार न कोई हुआ..  ना होगा, तो चलिए देखते हैं पत्रकार तोताराम की एक साल के ३१० दिन की रिपोर्ट। 

मैं पत्रकार तोताराम आपका पुराने बस्ती के समाचार में स्वागत करता हूँ। मोदी जी के एक साल की रिपोर्ट में हम उन ३१० दिन का जिक्र करेंगे जो मोदी जी ने भारत की व्यवस्था में अच्छे दिन लाने में लगाये। आप सोच रहे होंगे कि मैं बार-बार साल में ३१० दिन का जिक्र क्यों कर रहा हूँ जबकि साल में तो ३६५ दिन होते हैं, तो भाई ५५ दिन तो मोदीजी विदेश यात्रा में थे और हमारे सर्वे के कई दर्शकों ने उन ५५ दिनों को अच्छे दिन कि शुरवात में अहम योगदान नहीं मानते हैं। इसलिए मेरी इस रिपोर्ट में सिर्फ ३१० दिन का जिक्र होगा। हमारा सर्वे बताता हैं की मोदी जी की एक साल की सरकार से एक कुछ लोग बहुत ही नाखुश हैं उन्हें कही भी अच्छे दिन नहीं दिखते हैं। उनके नाखुश होने के कारण निम्नलिखित हैं। 

हमारे एक पाठक (गडकरी जी का इससे कोई लेना देना नहीं है) ने बताया की उन्हें लगता था की मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने पर जब बादल गरजेंगे तो बादलो से समोसे और मिठाइयों की बरसात होगी लेकिन यहाँ तो बादल गरजते हैं और उनके छींटो से फसल बरबाद होती जा रही है। हमने तो तो मिठाई को सुरक्षित रखने के लिए घर में कोल्ड स्टोरेज बनवा लिया था और अब उसकी क़िस्त चुकाते-चुकाते हमारी हालत पस्त होते जा रही हैं। वही एक दूसरे पाठक (पुरानीबस्ती से इसका कोई लेना देना नहीं है) का कहना है की उसे लगा था मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने पर उसकी पत्नी उनसे खाना बनवाना बंद करवा देगी परंतु वो आज भी सुबह शाम खाना बना रहे है ....एक साहब ने तो ऑफिस आने जाने के लिए विलायती कार खरीद ली उन्हें लगा की मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने पर गाड़िया पानी से चलने लगेंगी तो अब वो भी अच्छे दिन नहीं देख पा रहे हैं। 

एक युवक मित्र ने बताया की उसने तो सिर्फ मोदी जी को इसलिए वोट दिया था की अच्छे दिन आने पर बिना पढ़ाई किये वो IIT-Jee की परीक्षा में पास हो जायेगा लेकिन हर बार की तरह इस बार भी उसके हाथ निराशा ही हाथ लगी और अब वो फिर से IIT-Jee की परीक्षा की तैयारी में लग गया है और अब पाँचवी और अंतिम बार इस परीक्षा में बैठगा। उस युवक का कहना है कि यदि मोदी जी एक सेक्युलर प्रधानमंत्री हैं तो मुझे इस परीक्षा में पास करवाके उन्हें इस बात को साबित करना चाहिए। 

मोदी की विजय यात्रा में चाय का योगदान बहुत अहम रहा है इसलिए हम एक चाय वाले के पास पहुँच गए परंतु वो भी एक साल पूरे होने पर खुश ना था। चाय वाले का मानना था की उसे लगा मोदी जी की जीतने के बाद चाय में शक्कर डालने की जरुरत ना होगी सिर्फ मोदी के भाषण चलाकर चाय मीठी हो जाएगी परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ। एक दिन एक ग्राहक ने चाय वाले से चाय में शक्कर डालने के लिए कहा तो उसने मोदी जी का भाषण चला दिया और बोला अब चाय पियो मिठास बढ़ गई होगी और इतनी से बात पर उस ग्राहक ने चायवाले को जमकर पीटा। 

मैं पत्रकार तोताराम मोदी जी से जानना चाहता हूँ कि कब बरसात होने पर आसमान से समोसे और मिठाई गिरेगी? कब उस बेचारे पत्नी के गुलाम लेखक को खाना बनाने से छुट्टी मिलेगी? कब कार पेट्रोल के बदले पानी से चलेगी? कब बिना पढ़ाई किये लोग IIT-Jee की परीक्षा में पास होंगे? और कब सिर्फ मोदी जी के भाषण से चाय मीठी हो जाएगी? यदि ये सब नहीं हो सकता तो फिर किस बात के अच्छे दिन ?

कैमरा मैन पुरानी बस्ती के साथ पत्रकार तोताराम - नमस्कार 

टिप्पणियाँ

  1. वाह बहुत बढ़िया 😁😁
    अच्छा मनोरंजन किया अच्छे दिन के जुम्ले ने। मोदीजी जिस दिन सरकारी कार्यालय से बायोमेट्रिक उपस्थिति बंद करवा देंगे उसी दिन से अच्छे दिन शुरू होंगे हमारे तो। 😂😂
    अमीन 🙏

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  2. बहुत खूब सर :)
    और किसी के अच्छे दिन आए न आए बेचारे पत्नी के गुलाम लेखक को खाना बनाने से छुट्टी जल्द ही मिल जानी चाहिए :)

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