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पंडित तोताराम बने पत्रकार

हर रोज ऑफिस आते-जाते पंडित तोताराम को देखने की इतनी आदत हो गयी थी की बिना तोताराम के ऑफिस जानेवाली सड़क सुनी-सुनी लगती थी। इस बार बनारस से आने के बाद पंडित तोताराम को एक भी दिन उस बरगद के पेड़ के नीचे नहीं देखा था। पंडित तोताराम का नाम रामलोचन उपाध्याय था परन्तु उनके तोते की चपलता देखकर लोग उन्हें पंडित तोताराम बुलाने लगे। पंडित तोताराम का तोता बहुत सयाना था और वो पंडित तोताराम के इशारे पर झट बाहर आता था बण्डल में से एक कार्ड चुन लेता और पंडितजी के हाथ में देकर चला जाता था। जाते जाते पंडित जी का तोता बोलता,"आप का दिन शुभ हो". पंडित तोताराम कार्ड देखकर भविष्यवाणियां करते थे और उनकी भविष्यवाणियां प्रायः सही होती थी।

भारत एक चुनावो का देश है यहाँ साल के हर महीने किसी न किसी राज्य में चुनाव चलते रहते है। विश्व की सबसे बड़े लोकतंत्र एक एक राज्य में चुनाव आरंभ हो गया। जी हा मैं भारत की बात कर रहा हू। भारत में चुनावो के शुरू होते ही २४X७ खबरियाँ ​चैनलों ने थोड़ी राहत महसूस की , क्योंकि अब उन्हें करामाती बाबाओ की कहानियाँ नहीं बनानी पड़ेंगी। चुनावो के माहौल में खबर चरोतरफ बिखरी पड़ी है और खबरियाँ चैनलों को सिर्फ उन्हें उठाकर सलीके से अपने अपने चैनलो पर दिखानी है। हर चैनल जाती-पाति, विकास, बिजली, पानी और सड़क पर मतदाता के बीच पहुँच कर उनकी राय पूछ रहा था। पत्रकार तपती धुप में कुछ कुछ देहाती दिखने की कोशिश कर रहे थे। कुछ पत्रकारों को इस कार्य में मसक्कत नहीं करनी पड़ी क्योंकि उनकी हाव-भाव और बोल-चाल से वो दिखते ही देहाती है।


चुनावो का दौर चालू था और सभी चैनलो ने अपने अपने ओपिनियन पोल के नम्बरो के साथ चार बुद्धिजीवियों को लेकर सभी राजनितिक पार्टियो का विश्लेषण कर रहे थे । हर चैनल वाले अपने अपने ओपिनियन पोल के हिसाब से पार्टियो को नंबर दे रहे थे। आपको ए जानकर की हैरानी होगी की १२५ करोड़ आबादी की इस देश में सभी चैनल वाले १ लाख लोगो को पूछकर हार-जीत का फैसला कर रहे थे। जीतने वाली पार्टी ओपिनियन पोल को लेकर ख़ुशी मना रही थे और हारने वाली पार्टी ओपिनियन पोल को मानाने को तैयार नहीं थी। छोटी बड़ी पार्टियाँ अपने आपको किंग मेकर बनाने में लगी थी। खबरियाँ चैनल वाले भी बुद्धिजीवियों के साथ बैठकर तुक्का लगा रहे थे।

चुनाव ख़त्म हो चुके थे और परिणाम आने में अभी तीन दिन बाकि थे। सभी चैनल इस बार अपने अपने एक्सिट पोल के साथ खबर दे रहे थे। एक  न्यूज़ चैनल के एंकर साहब तो कुछ यो बोलते थे जैसे युद्ध में जा रहे हो। तीन दिन बाद आने वाले परिणाम की कल्पना पर लोग दिनभर बहस कर रहे थे। 24X7 के खबरियाँ चैनलों के दौर में मात्र कल्पना और १ लाख लोगो से पूछे गए परिणामो पर घंटो बहस हो रही थी। फला पार्टी के जितने ​पर कौन गृहमंत्री बनेगा बहस यहाँ तक पहुंच गयी थी। इनमे से कई बातो का हकीकत से कुछ लेना देना नहीं था परन्तु बाबाओ की खबरों से बढ़िया चुनावी खबरों पर बहस करना था। बाद विवाद के इस दौर में सभी एंकर अपने चैनल को नंबर 1 बता रहे थे।


आखिर परिणाम आ गए।

आज ऑफिस जाते समय पंडित तोताराम बरगद के पेड़ के नीचे बैठे थे। मैं झट से पंडित जी के पास पहुँच गया। पंडितजी ने कहो आओ भाई कहा थे इतने दिन। मैंने कहा मैं तो यही था आप कहा लापता थे। पंडितजी ने कहा पूछो मत यार मै तो भविष्यवाणियां करने में व्यस्त था। इतनी सारी भविष्यवाणियां करना कोई आसान बात नहीं है। मैंने पूछा अरे पंडितजी इतनी भविष्यवाणियां किसकी कर रहे थे। पंडितजी ने कहा एक काम करो तुम ऑफिस जाकर आओ और मै भी जाकर मेरी भविष्यवाणियां की पेमेंट ले आता हूँ और शाम को चर्चा करते है। मैं ऑफिस पहुंचकर सोच रहा था की पंडितजी ने तो इस बार मोटा हाथ मारा है और फिर शाम को निकलते ही पंडितजी के यहाँ पहुँच गया।

मैंने कहा पंडित तोताराम अब बताओ इतने दिन कहा थे, तो पंडितजी ने जवाब दिया ​अरे भाई ये जो 24x7 खबरियाँ चैनल है उन लोगो के लिए भविष्यवाणियां कर रहा था। मैंने पूछा अरे उन्हें क्या बता रहे थे तो पंडितजी ने कहा,"ये जो ओपिनियन पोल और एक्सिट पोल में सारे नंबर थे वो मैं ही तो गुणा गणित करके बता रहा था और मैंने तो तीन अंग्रेजी चैनेलो को भी नंबर दे दिए और उन्होंने कांटा छापा करके नंबर कम ज्यादा कर लिए नहीं तो सभी के नंबर एक से लगते। उन्होंने ने मुझसे कहा है की मैं अगर इस बात का जिक्र बाहर करूँगा तो मुझे जेल भिजवा देंगे परन्तु तुम अपने हो इस लिए तुम्हे बता रहा हूँ लेकिन तुम किसी को भी इस बारे में मत बताना। मैंने कहा पंडित तोताराम ………

पंडित जी ने मुस्कराते हुए कहा अब मुझे पंडित तोताराम मत कहो मै अब पत्रकार तोताराम हूँ।

नोट : कृपया इस लेख के बारे में अपनी राय नीचे कमेंट में जरूर लिखे। 
अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नई रचना के साथ 

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