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हिंदू धर्म - फिल्म पीके

हिंदू धर्म - इसका व्याख्यान और गुणगान जितना करो उतना कम है। हिंदू धर्म का निर्माण किसी व्यक्ति के द्वारा नहीं हुआ है। ये सनातन धर्म कई करोड़ वर्ष पुराना है और इस धर्म में भगवान की हर रचना को भगवान का रूप दिया है। हिंदू रीती रिवाजो में भगवान की पूजा अर्चना करने वाले कई रिवाज ऐसे है जिन्हे अब वैज्ञानिक पद्धति से भी सही ठहराया जाने लगा है और जल्द ही कई और रिवाजो को सही ठहराया जायेगा। अब तो विज्ञान भी कहता है की ओम के जयघोष से मन को एक अनोखा बल प्राप्त होता है जो मानव को अपने जीवन में कई तरह की बुराइयो से लड़ने के लिए ताकत प्रदान करता है। 

हिंदू धर्म में किसी एक धर्म गुरु का प्रावधान नहीं है और इसका लाभ कई सालो से कुछ धर्म के ठेकेदार लेते आ रहे है।  परसाई जी की एक कहानी में एक पंडित मरने के बाद नरक लोक में चला जाता है। नरक लोक को देखकर उसे लगता है की यमराज ने गलती से उन्हें वहां भेज दिया तो वो अपनी याचना लेकर यमराज के यहाँ पहुंच जाते है। यमराज पंडित जी को बताते है की किस तरह उनके रोज लाउड स्पीकर पर भजन करने से एक बूढ़े बीमार आदमी को अपनी जान गवानी पड़ी और एक विद्यार्थी उनके भजन के चलते पढ़ाई ना कर पाया और परीक्षा में फेल होने पर उसने आत्महत्या कर ली और इसलिए लाख पूजा अर्चना करने के बाद भी उन्हें नरक लोक में ही रहना पड़ेगा। 

आज कल तो हवा में हाथ उठाकर ताबीज और माला निकालना बहुत ही आम बात है। लेकिन बाबा लोगो ने इस काम में महारत हासिल करने के साथ साथ ही काले धन को सफ़ेद और सफ़ेद धन को काला करने में महारत हासिल कर ली है। पीके फिल्म में धर्म के इन ठेकेदारो को पर्दा फास किया गया है। कुछ ही महीनो पहले महाराष्ट्र में नरेंद्र दाभोलकर जी को क़त्ल कर दिया गया। उनकी गलती सिर्फ इतनी थी की वो अंध विश्वास के खिलाफ लड़ रहे थे। इस संसार का सबसे बड़ा संकट धर्म है। यहूदियों और मुस्लिम शासको ने समय समय पर कई लोगो को धर्म के नाम पर कत्ले आम किया है। लेकिन हिंदू धर्म में शायद ही आपको कोई ऐसा राजा मिले जिसने धर्म के नाम पर लोगो का कत्ले आम किया है। 

समय के साथ सभी धर्म अपने मायने बदल रहे है और हिंदू धर्म भी इससे अछूता नहीं है। जैसे मैंने अपने आपको एक महान लेखक घोषित किया है कुछ उसी तरह कई लोगो ने अपने आपको को भगवान का दूत साबित करके लूट मचा रक्खी है। मैं सप्ताह में एक बार मंदिर जरूर जाता हूँ क्योंकि भगवान के आगे झुकने से मेरे अंदर एक नया जोश जागता है।  मेरे अंदर मानव जाति के कल्याण की भावन जागती है और सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण बात ये है की भगवान के सामने मत्था टेकने से मेरे अंदर जीवन में कुछ करने की एक उम्मीद जागती है। बाबा लोग आपके मन के डर को और बढ़ाकर आपसे पैसे ऐठने का काम करते है और आप डर से उनके झांसे में आ जाते है। पहले इंसान घर बार त्याग कर जंगल जाता था लेकिन आज के बाबा लोग शहर में AC कमरे में बैठकर लोगो को ज्ञान बांट रहे और भोग विलास की सभी सुख सुविधाओ का आनंद ले रहे है (कुछ अपवाद सब जगह होते है और इस फील्ड में भी कुछ अच्छे लोग मिल जायेंगे). . . . 

जहाँ तक मेरा मानना है तो सतयुग से लेकर कलयुग तक कई लोगो ने भगवान को लोगो के दिलो से मिटाने की कोशिश की परंतु वो कभी इस काम में सफल नहीं हुए। तो कलयुग में एक फिल्म के कारण हिन्दू धर्म नहीं मिट सकता है लेकिन हा धर्म के नाम पर लोगो को लूटने वाले इस फिल्म से कमजोर हो सकते है और शायद इसलिए वो पीके फिल्म को हिन्दू धर्म के खिलाफ बता रहे है।  मै तो आप से कहूँगा की एक बार जाकर पीके फिल्म जरूर देखना और यदि आपकी भावना आहात हो जाये तो भगवान के पास जाकर फिल्म बनाने वाले के बुरे होने की कामना करना क्योंकि अधिकतर लोग भगवान के पास व्यापार करने ही जाते है ना की मत्था टेकने। इसे पढ़ने के बाद जो भी गाली लिखनी हो उसे कमेंट बॉक्स में लिख देना। मैं हिंदू धर्म का भक्त हूँ तो आपका गालियों वाला प्रसाद सहज रूप से ग्रहण कर लूंगा। 

Note : अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नई रचना के साथ। अपनी पुरानी बस्ती में आते रहना। इस रचना पर आपकी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में लिखना न भूले।

टिप्पणियाँ

  1. Mere bhai ek baar Navada Bhakti jo shri RAM ne laxman ko or shabri ko batai thi jao par le. http://www.bhajanganga.com/mobile_bhajan/lyrics/id/508/title/navdha-bhakti-shree-ram-charit-manas-ramayana. Aur sare Sant galat nahi hote pata nahi tera pala kaise santo se para hai. GITA par ya sun http://yatharthgeeta.com/Home.html. Tuje ye nahi dikh raha log jo oppose kar rahe hain vo is liye nahi ki thag baba ko dikhaya hai vo to hote hi hain lekin aap ko murtiyon, Shiv Ji ka aapman karne ki kya karurat thi. Kher bhagwan ka aapman to koi kar hi nahi sakta vo to maan aapman se pare hain. Lekin unke bhakton ko dukh hota hai For ex(Not really but near by) agar main tere samne tera pitaji ko gali dun to tere pitaji usse hurt nahi honge kyun ki unhen pata hi nahi. Lekin tu muje reply main char gali jarur dega. Lekin bhagwan to NIRGUN hain maan aapman se pare hain wah sab jante hain. Aab ek baar GITA aur NAVADA bhakti jaruru suniyo agar sahi main mandir jata hai to. Dhanyawad

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  2. धर्म के नाम पर मार काट वही करते हैं जो धर्म को ठीक से समझ ही नहीं पाते हैं. वो हिन्दू हो, मुस्लमान हो या ईसाई या कोई और. जो समझते हैं वो या तो सभी को बराबर नजर से देखते हैं या फिर किसी को मानते ही नहीं और यकीन मानिए, इस वक़्त जो शांति हैं इन ना मानने वालों और सभी को बराबर नज़र से देखने वालों की वजह से ही है. जो एक दो किताब पढ़कर ज्ञान बांटने माइक के सामने बैठ जाते हैं वो ही मार काट की जड़ होते हैं

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    1. Bhai pehli baat aapki sahi lagi lekin dusari baat nahi ki kitab parke gyan batne lag jate hain. Yah to vaise hi hua ki sare mulsalman atanvadi hai(joki katayi sach nahi ho sakta).

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  3. Bhai Parsai ji ki kahani se bachpan yaad dila diya. or ek baat or aapka likhna wrong number nahi hai. aap sach me ek achhe writer ho. _/\_

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  4. hame yah samajana hoga ki sirf kuchh savalo se dagmagaa jaay , hamara dharm itna nirbal bhi nahi...

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  5. बुराई किस धर्म में नही है। हमें उन्हें दुर करने का प्रयास करना चाहिए। गाय को चारा खिलाने से धर्म तो मिल जाता है। बढ़ती गौ सेवा से मुस्लिमों में द्वेष है। गाय काटने वाले सेवा का सुख क्या समझेगे। धर्म के नाम पर क्या मस्जिदो और चर्च में व्यापार नही होता। पर इसे कोई नही दिखायेगा। हिन्दु धर्म की बुराई दिखाने वाले जरा अपने धर्म की और झांक कर देखे। रोजाना गाय का मांस और तीन तीन शादि करने वाला मुस्लिम धर्म की बुराई की कभी बात नही करेगा। कभी सत्यमेव जयते में मुस्लिमों की बुर्का प्रथा, बहुविवाह की बात नही करता।

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  6. बहुत खूब। हम भी इसपर कुछ लिखने का सोच रहे थे।

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  7. jaisi hamari soch, sangati, karm, antar aatma jo hamen man me dharan karna sikhati hai aur hamari vivek shakti jo hamen paanch gyaan indriyaan paanch karm indriyaan aur ek mann se pare hai inke anusaar hi hamen is jeewan me prapt ho jaata hai zahar ka kida zahar me rahkar bhi marta to nahi hai na, thik vohi hai jis karm ko karne se sabhi ka bhala ho to phir hindu dharm ke sanskar kyon nahi apnane chahiye!

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