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हम आलोचक है

आलोचना करना और आलोचक बनना दुनिया का सबसे आसान कार्य है। मैं ऐसे बहुत लोगो को जानता हू जिन्हे अपनी जिंदगी में कभी बल्ला पकड़ने का मौका नहीं मिला परन्तु वो हमेशा सचिन कि बल्लेबाजी में खामिया निकालते रहते है। मैं ऐसे बहुत लोगो को जानता हू जिन्होंने अपनी जिंदगी मैं कभी ढंग से कविता कि एक पंक्ति नहीं पढ़ी और वो हिमेश रेशमिया के गाने और गाने के तरीके कि आलोचना करते है। कुछ ऐसे भी लोग है जो ढंग से बोल नहीं पाते और सलमान खान के अभिनय कि आलोचना करते है(अच्छा अभिनय वाली बात पर क्षमा कर दे)। हम सभी बहुत ही बेहतरीन आलोचक है। हम का मतलब महान भारत देश के सभी नागरिक।

हम आलोचना करने में इतने उस्ताद है की कपिल देव को वर्ल्ड कप जीतने के प्रो टिप भी दे देंते है, ए सोचे बिना की वो भारत के लिए एक बार वर्ल्ड कप जीत चूके है। हमारे समाचार चैनल के लोग हमारे बीच से ही आते है इसलिए भारत के क्रिकेट जीतने पर एक धुआंधार स्क्रिप्ट और हारने पर लात मुक्को से बनी बेइजत्ती के रेकॉर्ड तोड़ती हुई दूसरी स्क्रिप्ट चैनल वाले लेकर हाजिर रहते है।​ ​हम सब भी दोनों स्क्रिप्ट का जोरदार मजा लेते है। आलोचना करने में हम सब भारतीय इतने आगे है शर्मा जी की लड़की घर से कितने बजे निकलती है और कितने बजे आती है इन सब बातो का ध्यान रखते है और जब मौका मिला शर्मा जी की लड़की की आलोचना करके मजे लेना चालू कर दिया।

शर्मा जी की लड़की की आलोचना करते - करते कब अपने बच्चे गलत संगत और बुरी राह पर निकल पड़ते है इस बात का आभास बहुत देर से होता है। शर्मा जी की लड़की के लव मैरिज करने से शर्मा जी के परिवार को कोई परेशानी नहीं लेकिन हम सबको बहुत परेशानी होती है और उस बेचारी के विवाह में न हुई घटनाओ को भी गढ़ कर हम खूब मजा लेते है। और जब हमारे बच्चे लव मैरिज कर ले तो हम उसे नए नए बहानो के साथ जायज बताते है। दिन भर बेंच पर बैठे बूढ़े चाचा ही नहीं बल्कि हम सब मिल जुलकर लोगो की आलोचना करके खूब मजे उठाते है और फिर अंत में बूढ़े चाचा पर सारा दोष मढ़ देते है की इनके पास काम धंधा नहीं है तो दिन भर बैठ कर दुसरो की बुराई करते रहते है।

पाण्डेयजी का लड़का शराब पीता है। ए बात हम लोगो को जाकर यो बताते है की वो रोज डाका डालके आता है और मोहल्ले की लड़कियों को छेड़ता है। पाण्डेयजी के लड़के से तो कुछ सीखो, यदि वो सिगरेट पी रहा हो तो हमको को देखकर छुप जाता है सिर्फ हमको सम्मान देने के लिए परन्तु हम गांव के गवार इसे उसका डर समझ लेते है, मूर्खता की भी हद है जब वो अपने बाप से नहीं डरता तो हमसे क्यों डरेगा। जब हमारा बेटा शराब पीकर घर आना चालू कर दे तो उसके आने पर भीगी बिल्ली बनकर एक कोने में​​ बैठ जाते है, ये सोचकर की यदि हमने कुछ कहा तो वो हमपर चिल्ला पड़ेगा और मोहल्ले वालो को पता चल जाएगा की आज हमारा बेटा शराब पीकर आया है। वाह भाई वाह आपकी इज्जत - इज्जत और पाण्डेयजी की कुछ नहीं।

यदि हमारे आलोचनाओ की कहानियां लिखू तो समय कम पड़ जाए। आलोचना करने पर यदि भारत रत्न देने लगे तो हर वर्ष करोडो लोगो को पुरस्कार बांटते-बांटते राष्ट्रपति साहब के हाथ में दर्द होने लगे या फिर दूसरा रास्ता ये है की भारत रत्न सभी दावेदारों को डाक के द्वारा भेज दिया जाए। हम किसी और कि गलती होने पर सभी नियम कानून का पालन करते हुए आलोचना में लग जाते है। और अगर हमारी गलती हो तो झट से सिक्के के दूसरे पहलू पर चले जाते है।​ ​जो शर्माजी की बेटी और पाण्डेयजी के बेटे के लिए गलत था वो हमारे घर में होने पर, हम उसे सही ठहराने लगते है और सिर्फ इसी कारण कई झगड़े हमारे मोहल्ले में रोज होते है। हम सब को इस आदत को त्यागना होगा और याद रखना सिर्फ​ ​बेंच पर बैठे चाचा नहीं हम सब इस गलत आदत के भागीदार है।

आलोचना और बुराई करने में फर्क है लेकिन हमने दोनों को एक जैसा बना दिया है। आलोचना व्यक्ति विशेष के कमियों को उजागर करके उसे सही रास्ते पर ले जाना होता है जबकि बुराई सिर्फ मजे लेने के लिए की जाती है। अब ए लेख पढ़कर मन में सोच लेना की इसके पास कुछ काम धंधा नहीं है तो ब्लॉग लिखकर बड़ी बड़ी बात करता है।


नोट - अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नई रचना के साथ। 

टिप्पणियाँ

  1. का जी बहुते आलोचना कर रहे है। इस तरह की आलोचना का कोई अगला ब्लॉग आया तो पूरा का पूरा कॉपी करके छाप लेंगे फिर करते रहिएगा हमारी आलोचना। :P ~ एक ट्वीट चोर

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    1. धन्यवाद ट्वीट चोर भाई, लेकिन ब्लॉग चोरी करने के लिए पहले एक ब्लॉग भी बनाना होगा

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  2. वास्तविक जीवन की वास्तविकता की सही सही चित्रण बहुत खूब ।।

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    1. वास्तविक जीवन का चित्रण लोगो को पसंद नहीं आता है

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  3. आलोचना करना अब वैसा ही हो गया है जैसे हर मौसम में आम खाना.. आसान काम है.. हाइब्रिड चीजें आराम से उग आती है, और आलोचना करना भी वैसा ही है आज कल. पहले वाली बात नहीं. अब सिर्फ मुह खोल कर बकना तक ही सिमित है आलोचना में. पहले लोगों की उनके पीछे की facts तक पता होते थे. हमें तो अभी ठीक से ये भी नहीं पता की कपिल की कितनी century हैं या salman की उम्र क्या है. इसके लिए हमें google ही मदद करेगा. हम dependent है अपनी हर चीज के लिए. वैसे हमारी आलोचना ही dependent हो चुकी है. अगर कोई कुछ करेगा तो हम आलोचक बनेंगे नहीं तो हमें किसी से मतलब ही नहीं रहता की वो है भी या नहीं

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    1. बहुत सही कहा डीके की आलोचना नहीं करेंगे तो किसी से मतलब भी नहीं रखेंगे

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  4. बहुत खूब आलोचना की है आलोचकों की

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  5. बहुत खूब आलोचना की है आलोचकों की

    -ढाईकिलोकाट्वीट

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  6. का करें भाई साहब, खुद से तो कुछ उखड़ा नहीं, दुसरे बहुत कुछ हासिल कर के मुह पर तमाचा जड़ देते है... अब हम का उनकी बुराईओ ना करें??? जिन्दा रहने के लिए कुछ तो करने दो...

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    1. दुसरो की आगे बढ़ता देख हम आलोचना शुरू कर देते है।

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  7. बहुत अच्छा वास्तविकता का एक बेहद खूबसूरत लेखांकन किया आपने ।। अपना नाम लिखना चाहता था लेकिन अब सिर्फ ---
    एक आलोचक

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    1. नाम लिखिए, आपके नाम की भी आलोचना कर देंगे लोग

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  8. मैं इस बेकार से लेख की कड़ी आलोचना करता हूं।

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  9. हम आलोचना के नाम पर एक आडंबर का प्रतिनिधित्व करते आ रहे ; और वो आडंबर एक दिन मिथ्या साबित हो जाता जब खुद उस से रूबरू होते !

    सहज लेखन शैली में एक अच्छा लेख !

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  10. आलोचना इस देश का पंसन्दीदा खेल है और हर कोई इसे बड़ी खूबी से खेलता भी है , इसके बीज बड़े गहरें है, और ये आज से नही हमारे पुराणों से चले आ रहे है जब महाभारत में भाई भाई की आलोचना करने से पीछे न रहे, अजी तो हम और आप तो अभी बच्चे है, इसमें हमारा दोष नही है जैसा हमें दिखाया सिखाया जाता है हम वही करते है पहले हमें अपनी सोच बदलनी होगी ताकि आगे की पीड़ी में ये महा मारी न फैले ! खैर, बहुत खूब आलोचना को लिखा लिखते रहिएगा - @theamarjeet

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  11. बहुत ही सहज और बढ़िया लेखन ....

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  12. कुछ तो लोग कहेंगे। लोगो का काम है काम है कहना!

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  13. बहुत सही नब्ज़ पकड़ी है. हम लोग दूसरों की बुराई और गॉसिप का इतना मज़ा उठाते हैं कि आलोचना शब्द का मतलब ही बदल गया है. अब तो मैदान के बाहर बैठकर सिटी बजाना और ताली बजाना भी भूल चुके हैं हम. अगर कुछ बचा है तो वो स्वयंभू आलोचकों द्वारा आलोचना!!
    Tweet@: piyushKAVIRAJ

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  14. एक बात तो तय है कि ेआलोचना व्यक्ति की प्रतिभा में निखार आता है, एक कलाकार भी अपनी ही बनाई मूरति और चित्र की आलोचना करके उसे और उत्कर्ष बना देता है !!
    आपके व्यंग की बात किया जाये तो इसमे कोई दो राय कि आप भी शब्द चुन कर उसकी खुशबु फैलाने में माहिर है !!

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  15. हमें और हमारे संगी-साथियों को तो हमारे अध्यापक महोदय ने कॉलेज में ही उम्दा आलोचक की श्रेणी में रख दिया था और इसी के मद्देनज़र पूरा पाठ समाप्त करने के बाद कहते थे बेटा आलोचना स्वयं कर लेना उसमें तो आप सब को महारत हासिल है। हाँ, रही बात आस-पड़ोस के आलोचना की तो देख भाई, अब तक केक काटते हुये ताली बजाकर हैप्पी बड्डे गाना तो हमसे हो ना पाया तो आलोचना क्या घंटा करेंगे हम। हें ?

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  16. मै भी कभी कभी इस बात पर दुसरो को लेक्चर देता हूँ पर सच्चाई ये भी है कि मै भी एक आलोचक हूँ। पागल इन्जिनीयर...

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    1. हम सब आलोचक है, सबसे आगे वो जायेगा जो अपने आप की आलोचना करता है

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  17. बहुत अच्छा लगा। समाजिक ताने बाने का सटीक, सरल विश्लेषण..कड़वा सच, मृदु लेखन की थाली में प्यार से परोसा गया

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  18. बहुत अच्छा लगा जो आपने आलोचना और बुराइ में अंतर बता के । आपका धन्यवाद ।

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  19. हाहा्् 😂 😂 बिल्कुल पूरा पूरा सच दिखाया है भाई आपने.......और आलोचना व बुराई का फर्क तो शायद बहुत कम लोग जानते होंगे।।।।।

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  20. लेखक महोदय , निन्दारस एक ऐसा रस है जिसे हर कोई पीना चाहता है तथा निन्दा और अलोचना में ज्यादा अन्तर नहीं होता हैं |

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  21. आलोचना करना और आलोचक होना बहुत कठिन काम है अगर ये निष्पक्ष रवैये को न दर्शाता हो ! अच्छी कोशिश है इस विषय पर ! आपको भी इसकी आलोचना का सामना करना पड़ेगा :D

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  22. यहाँ पर आप आम लोगों की आलोचना कर रहे हैं या बुराई? ;)

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  23. वास्तव में हम दूसरों की आलोचना कर यह सिद्ध करना चाहते है कि हम कितने अच्छे है! बहुत बढ़िया लेख।

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  24. आपका लेख तो अच्छा हैं लेकिन एक अछे लेखक में जो भाषा की शुद्धता होनी चाहिए उसकी कमी हैं, शब्दों का उपयोग कुछ ज्यादा ही किया गया हैं एवं कई शब्दों की पुनरावर्ती हैं, पेज का पूर्ण उपयोग नही किया गया हैं - एक आलोचक

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