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#कविता - पापा की अंग्रेजी शराब

आज दोस्तों के साथ
जब अंग्रेजी शराब की
बोतल खोली,
तब आँखों से पानी
टपक पड़ा।

कुछ मध्धम
धूमिल यादो में
एक तस्वीर सी
नजर आई
पापा की मेरे।

पीते वो भी अंग्रेजी थे
पर वो थोड़ी सस्ती थी
मेरी पढ़ाई - लिखाई
के खर्च से तनख्वाह
कहा बचती थी।

सोचा जब बड़ा होकर
चार पैसे कमाऊंगा
पापा को
सबसे महंगीवाली
अंग्रेजी शराब पीलाऊंगा।

अब बोतल अंग्रेजी
घर पर रहती है,
पापा की तस्वीर
शायद उन्हें आँखों
से तकती है।

सोचता हूँ एक दिन
मैं भी तो 
वहां जाऊंगा
चुपके से अंग्रेजी बोतल  
पापा को थमा
आगे निकल जाऊंगा।


अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नई रचना के साथ। अपनी पुरानी बस्ती में आते रहना।
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टिप्पणियाँ

  1. बहुत ही सुन्दर और मार्मिक रचना

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    1. धन्यवाद - लिखते लिखते आँखे नम हो गई थी

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  2. kuchh udaas kar diya, is kavita ne, chhu gayi, dil k kore kagaj ko

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    1. पुरानी बस्ती घूम आयें,, एक बार ऐसी कई कवितायेँ मिलेंगी

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  3. बेहतरीन रचना ..... शराब पुरानी बस्ती मे ही अच्छी मिलती है... अब तो नियमित यहा आना होगा...

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