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जन्नत हॉउस

हमारी पुरानी बस्ती में जब भी शादी-व्याह का मौका आता है हर किसी को जन्नत टेंट हॉउस वाले को याद करना पड़ता है। चांदनी और टेंट तो जन्नत टेंट हॉउस वाले साबिर चचा को ही लगाना है। हमारी पुरानी बस्ती में साबिर मिया के पिताजी भी टेंट हॉउस लगाते थे। पिताजी के इंतकाल के बाद साबिर मिया ने बखूबी अपने कार्य को आगे बढ़ाया और यही कारण है जो आज भी लोग साबिर मिया को टेंट हॉऊस लगाने के लिए बुलाते है। साबिर मिया का टेंट हॉउस के परदे, उसपर की नक्काशी, वो रंग बिरंगे चित्र इन सब को देखकर साबिर मिया के टेंट को लोग जन्नत टेंट हॉउस बुलाते है । 

चलिए आपको रिजवान चौधरी से मिलाते है। रिजवान भाई एक सच्चे मुसलमान है परंतु वो शराब खूब पीते है, सिर्फ शुक्रवार को नमाज पढने मस्जिद जाते है। अय्याशी करने में इनका कोई सानी नहीं है। काम धंधा नहीं करते, बाप दादा अंग्रेजो के साथ व्यापार करते थे तो पुस्तैनी धन काफी पड़ा है। इस्लाम कहता है की जरूरतमंद स्त्री को सहारा देने के लिए आप एक से अधिक शादी कर सकते है। रिजवान भाई ने अपनी जरूरत के हिसाब से इस्लाम धर्म के शब्दों को ढाला और इन्हे लड़कियों का बहुत शौक था इसलिए ३ शादिया कर ली और इनके घर का नाम जन्नत हॉउस है। 

शहजाद को आप सब जानते ही है, जन्नत गेस्ट हॉउस के मालिक। पुरानी बस्ती के रेड लाइट एरिया में इनका गेस्ट हॉउस है। इनके गेस्ट हॉउस में इतने बड़े बड़े नेता और व्यापारी आते है की पूछो मत। कई लोगों के घरो को बर्बाद करने में इनके गेस्ट हॉउस का अहम रोल है। शराब, शबाब और न जाने कितने इस्लाम धर्म के विरुद्ध होने वाले सभी कार्यो में शहजाद भाई बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते। मुस्लिम तीज त्योहारो में बढ़-चढ़कर पैसा खर्च करते है इसलिए इनके नाम से कभी कोई फतवा नहीं निकला जो अधिकतर इस्लाम धर्म के गुरु इस्लाम के खिलाफ काम करने वालो पर निकालते है। 

अब बात करते है जन्नत पासपोर्ट ऑफिस की - जन्नत पासपोर्ट ऑफिस का काम लोगो से पैसा लेकर उनको विदेशो में छुट्टी मनाने भेजना है। लोगो को लोक लुभावने ऑफर देकर लोगो के पैसे ऐंठना इनका काम है। ठगी का हाल इस कदर है की ३५००० रुपये में मिलाने वाला १ सप्ताह का बैंगकॉक का पैकेज ये १,३५,०००/- रुपये में देते है। कहते है की जो ५,३५,००० /- रुपए देगा उसे ७२ लड़कियों वाले पैकेज में बैंगकॉक भेजा जाएगा। इस पैकेज में ७२ देशो की लड़किया ७२ घंटे तक आपकी सेवा में रहेंगी और आपको जन्नत में होने की अनुभूति कराएंगी, शायद वो पाकिस्तानी क्रिकेटर इनका एजेंट है और श्रीलंका के क्रिकेटर को कमीशन के लिए ये पैकेज बेच रहा था। 

चलते चलते बस इतना कहूँगा मजहब नहीं सीखता आपस में बैर रखना तो अपने धर्म में विलीन हो के अपनी इन्द्रियों पर काबू पा लो तो आप को जन्नत का एह्साह यही हो जायेगा। धर्म परिवर्तन से नहीं कर्म परिवर्तन से महान बनो।

इस लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें जरूर लिखे, अगले सोमवार फिर एक नई रचना के साथ मिलेंगे। 

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