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श्री गणेश की पीआईएल - II

नारद मुनि चुप-चाप एक कोने में खड़े होकर सारी बांते सुन रहे थे। सरकारी वकील के तर्क में बहुत ​दम था और उनके पास सभी तर्कों को समर्थन करनेवाले दस्तावेज ​मौजूद थे। नारद के माथे से सेंटरलाईजड एसी होने के बावजूद पसीना टपक रहा था वाही दूसरी तरफ श्री गणेश नारद को देखते और मुशक महराज के ऊपर क्रोधित होते। मुशक महराज को भी ​डर था यदि फैसला हमारे पक्ष में नहीं आया तो श्री गणेश इस सुझाव के लिए उन ​की खुराक पूरी तरह से न बंद कर दे। वही दूसरी तरफ सरकारी वकील एक के बाद एक करके श्री गणेश के पीआईएल की बधिया उधेड़ रहा था।

सरकारी वकील का पक्ष सुनाने के बाद ब्रम्हा जी ने नारद मुनि से श्री गणेश का पक्ष रखने को कहा​। नारद मुनि ने झट से अगली तारीख की याचिका कर दी। श्री गणेश का गुस्सा सातवे आसमान पर पहुंच गया। एक तो ये मामला इतने सालो से लंबित पड़ा था और आज जब सुनवाई हो रही है तो हमारे वकील ने ही तारीख मांग ली। ब्रम्हा जी ने सरकारी वकील की राय लेकर एक हफ्ते बाद की तारीख दे दी। ​पीआईएल सार्वजानिक हितो के लिए होता है और न्यायालय की नए दिशानिर्दोशो के दबाव के कारण ब्रम्हा जी को भी इस मामले में जल्द से जल्द निर्णय सुनाना था।

​एक हफ्ते बाद न्यायालय की तारीख आ गयी। नारद मुनि को छोड़कर सभी न्यायालय में उपस्थित थे। ब्रम्हा जी के आने पर सभी खड़े हो गए। सरकारी वकील ने मुस्कराते हुए कहा माय लार्ड आपके चहिते नारद मुनि आज न्यायालय नहीं आये है। तब तक हड़बड़ते - गड़बड़ते नारद मुनि भी न्यायालय पहुंच गए। उनके चेहरे से साफ झलक रहा था की वो रात भर सोये नहीं है, वीणा के बदले बहुत से केस नोट्स हाथ में थे। गणेश और मुशक महाराज नारद मुनि को देखकर थोड़े शांत हुए। ब्रम्हा जी ने कार्यवाई शुरू करने के आज्ञा दी।

नारद मुनि ने अपना सबसे पहला गवाह पेश किया। खूब हाथ पैर जुड़वाने के बाद यमराज ने एक धरती वासी की आत्मा को न्यायालय में आने की अनुमति दी थी। नारद मुनि ने अपने गवाह से पूछा भाई तुम्हारी मौत कैसे हुई थी। गवाह ने बोलना शुरू किया जी मै एक दिन गणेश उत्सव के लिए चंदा वसूल रहा था उसी वक्त दूसरे पंडाल वालो के साथ हाथ पाई हो गई। उनके हिसाब से मै उनके इलाके से चंदा वसूल कर रहा था। उस वक़्त तो पुलिस के आने पर सब जान बचाकर भागे परन्तु गणपति विसर्जन के दिन दूसरे पंडाल वालो ने भीड़ का फायदा उठाकर मेरा क़त्ल कर दिया।

नारद मुनि ने गवाह से अगला प्रश्न पूछा, "गणपति के चंदे के लिए तुम आपस में क्यों झगड़ते हो वो पैसा तो वैसे भी तुम गणपति प्रयोजन में खर्च कर देते हो न ?" गवाह ने जैसे ही मुह खोला उसे नारद मुनि ने तुरंत याद दिलाया की जो भी कहना सच कहना नहीं तो तुम्हे फिर से धरती पर भेज दिया जायेगा। गवाह ने बोलना शुरू किया, माई-बाप गणपति में आने वाले कुल चंदे में से हम सिर्फ ४०%​ का ही गणपति प्रयोजन में उपयोग करते है। बाकि की रकम का एक हिस्सा अपने दगडू भाई को जाता है और बचा हुआ हम सब दारू-शराब में उड़ा देते है।.………… और सरकार इतना ही नहीं हम ९ दिन तो अपने घर भी नहीं जाते थे। रात भर पंडाल में दारू पिते और पत्ता खेलते और दिन में पंडाल के पीछे जाकर सो जाते थे। गणपति के ९ दिन की जिंदगी इतने ऐशो आराम से कटती थी की पूछिये मत और ऊपर से अपने जेब से एक रुपया भी नहीं लगता था।


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अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नए व्यंग के साथ।
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