​पुरानीबस्ती पर प्रकाशित सभी ख़बरें सिर्फ अफवाह हैं, किसी भी कुत्ते और बिल्ली से इसका संबंध मात्र एक संयोग माना जाएगा। इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। इसे लिखते समय किसी भी उड़ते हुए पंक्षी को बीट करने से नहीं रोका गया है। यह मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है। यदि आप यहाँ प्रकाशित किसी लेख/व्यंग्य/ख़बर/कविता से आहत होते हैं तो इसे अपने ट्विटर & फेसबुक अकाउंट पर शेयर करें और अन्य लोगों को भी आहत होने का मौका दें।

श्री गणेश की पीआईएल - III

नारद मुनि ने गवाह को धन्यवाद देकर जाने को कहा। नारद मुनि ने अपना अगला तर्क पेश किया। जी हम माय लार्ड की इजाजत से एक वीडियो आपको दिखाना चाहते है। ब्रम्हा जी ने झट से अनुमति दे दी। नारद मुनि ने वीडियो शुरू किया। सबसे पहला ​गाना बजा (मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिए) फिर दूसरा गाना बजा (शीला-शीला की जवानी) नारद मुनि ने वीडियो बीच में रोक दिया। ब्रम्हा जी ने कहा अरे भाई बजने दो फिर अपनी गरिमा का ख्याल करते हुए कहा, तो इससे तुम क्या साबित करना चाहते हो। नारद मुनि ने तीसरा गाना बजाते हुए कहा ये सबसे फेमस गाना है गणपति ​भक्तों का (मूंगड़ा-मूंगड़ा मैं गुड की डली........... दारू की बोतल थम ले. वो अनाड़ी शराबी) . 

नारद मुनि ने आगे का गाना बजने से पहले कहा की माय लार्ड हमारे रिसर्च से पता चला है की इस बार गणपति उत्सव में जो गाना टॉप पर रहेगा वो है। (​ये दुनिया - ए दुनिया पित्तल दी, बेबी डॉल मै सोने की।……… बेबी डॉल मै सोने की, बेबी डॉल मै सोने की​)​यदि यहाँ तक ही बजता तो ठीक था लेकिन ये मनचले दूसरा गाना जो बजने वाले है वो है ​( ​चार बॉटल वोडका, काम मेरा रोज का​) . इस तरह के गानो के कारण ही गणेश ९ दिन तक ना सुनने वाली शक्ति का उपयोग करते और अपने कान बंद कर लेते है और यदि ऐसा ही चलता रहा तो उन्हें आँख बंद करने की सिद्धि भी प्राप्त करनी पड़ेगी।

नारद मुनि ने आगे कहा की गणपति उत्सव के बदलते स्वरुप का कारण हमारे वातवरण को भी नुकसान हो रहा है। बम फोड़कर वायु प्रदुषण करना, भद्दे भद्दे गाने बजकर ध्वनि प्रदूषण करना और केमिकल से बनी मूर्तियों का उपयोग करके जल प्रदूषण करना अब ये धरती वासियो के लिए आम बात है। और हमारे रिसर्च में ये भी पता चला है की जल्द ही अग्नी देव, वायु देव और जल देव भी इस मामले में पीआईएल याचिका दाखिल करने वाले है और यदि हम इस मामले का निपटारा कर ले तो हम न्यायालय का काफी समय बचा सकता है।

​ब्रम्हा जी ने इस मामले पर अपना निर्णय सरंक्षित  कर लिया और अगले सप्ताह की तारीख पर फैसला देने के लिए कह दिया। इसी बीच न्यायालय की आंतरिक जाँच से पता चला की गणपति उत्सव के चंदे और चढ़ावे का एक बड़ा हिस्सा न्यायालय, देवसभा ​और सर्वोच्च सभा के साथ ही साथ कई छोटे-बड़े रेवेन्यू एक्सपेंडिचर के लिए होता है। यहाँ तक की इस मामले में न्यायलय की जो जांच एजेंसी है उसका सारा खर्च उसी चढ़ावे के पैसे से होता है। यदि गणपति उत्सव बंद हुआ तो देवतंत्र के राजस्व को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।

ब्रम्हा जी को भी अप्रत्यक्ष रूप से होशियार कर दिया गया की सोच समझ कर निर्णय देना नहीं तो उनका ग्रीष्मकालीन अवकाश भी बंद हो जायेगा। एक सप्ताह के बाद सभी न्यायालय में मौजूद थे। मुशक राज आज सबसे खुश थे की केस का फैसला आते ही उन्हें अंतिम बार नारद मुनि की फीस का भुगतान करके छुट्टी मिलेगी और आगे की जिंदगी चैन से कटेगी। ब्रम्हा जी ने फैसला पढ़ते हुए कहा,"सरकारी पक्ष और श्री गणेश के पक्ष के तर्क सुनने के बाद न्यायालय इस फैसले पर पहुंची है की गणेश उत्सव से श्री गणेश को छोटी-मोटी परेशानिया होती है परन्तु ​भगवानो के ​​आर्टिकल १६ अ (१) के अनुसार हर कार्य से पहले श्री गणेश की पूजा करना अनिवार्य है न्यायपालिका के निर्देशो के अनुसार ये मामला हमारे कार्य क्षेत्र से बहार है इसलिए हम ​​इस ​पीआईएल​ को ख़ारिज करते है ​और आर्टिकल १६ अ (१)​ को ​देवसभा ​और सर्वोच्च सभा में विचार करने के लिए रिकमेंड करते है। 


इस लेख का भाग 1 पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे - श्री गणेश की पीआईएल
इस लेख का भाग 2 पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे - श्री गणेश की पीआईएल
इस लेख का भाग 3 पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे - श्री गणेश की पीआईएल

इस लेख के बारे में अपने सुझाव हमें नीचे टिप्पणी में लिखे। अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नए व्यंग के साथ। 
​​

टिप्पणियाँ

  1. janab purani basti, lajawab, badi sadgi k sath upmao ka aisa gathjod bahut kam dekhne ko milta h, maja aagaya, hum chahenge article ke punarvichar par bhi aap kuchh likhe.
    PS: hum bhi har saal ganpati bithate h, par bhagwan kasam itna bawal hum na karte h

    उत्तर देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें