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श्री गणेश की पीआईएल

भगवान श्री गणेश ने ब्रम्हा जी के न्यायालय में धरती पर गणेश उत्सव न मनाने के लिए एक पीआईएल दाखिल कर दिया ​था। ब्रम्हा जी के न्यायालय में जाने से पहले श्री गणेश ने इंद्र की छोटी न्यायालय में अपना पीआईएल सौंपा था। परन्तु इंद्र देव और उनके मित्र अमर तो है पर मरने से बहुत डरते है और जैसे ही राक्षशो की बात आती वो तुरंत पल्ला झाड़ मामला दूसरे के सर पर डाल देते है और इस बार भी धरती लोक का मामला इंद्र और उनके साथी वकीलो ने अपने कार्य क्षेत्र से बाहर का बताकर ब्रम्हा जी के न्यायालय में भेज दिया।

ब्रह्मा जी हर बार की तरह इस बार भी गर्मियों में न्यायालय बंदकर के अवकाश पर घूम रहे थे। गणेश जी की चिंता दिन बदिन बढती जा रही थी। भाद्रपद का महीना नजदीक आ रहा था। गणेश जी ने मन ही मन निश्चय किया की इस मामले का निपटारा होते ही वो एक और पीआईएल दाखिल करेंगे जिसमे न्यायालय और न्यायाधीशों को इतनी लम्बी छुट्टी पर जाने से रोका जाए। कितने लोगो का मामला सालो से न्यायालय में लंबित पड़ा है और ये न्यायाधीश साहब है की न्यायालय में ताला चाभी लगाकर छुट्टी पर चल देते है।

श्री गणेश इस मामले की पैरवी खुद करने वाले थे परन्तु मुशक महराज ने मामले की गंभीरता को समझते हुए, श्री गणेश से इस मामले में किसी बड़े ज्ञानी को पैरवी करने के लिए कहा। श्री गणेश झट इस बात पर मान गए और कहा की वकील की फीस का भुगतान मुशक महराज के कोटे की खान-पान से होगा। कई नामों पर जिक्र करने के बाद श्री गणेश ने अंत में महाऋषि नारद को अपनी पैरवी करने के लिए चुन लिया। नारद ने इससे पहले भी ब्रम्हा जी के न्यायालय में बहुत से मामलो पर तर्क-कुतर्क 
करके जीत हासिल की थी। 

न्यायालय ने सुनवाई का दिन तय किया। पीआईएल से जुड़े सारे दस्तावेजो को नारद मुनि ने न्यायालय में सौंप दिया। सुनवाई के दिन सभी न्यायालय में हाजिर हो गए। ब्रम्हा जी ने केस का नंबर आने पर गणेश जी को अगले साल के आषाढ़ महीने की तारीख दे दी। कई सालो तक तारीख पे तारीख का खेल यूही चलता रहा है। आखिर एक दिन न्यायालय ने केस पर सुनवाई शुरू कर दी। मुशक महराज अब पहले से काफी दुबले-पतले दिखते थे, नारद मुनि को अपने हिस्से की खानपान सामग्री देकर वो खुद कम ही खाना पाते थे, यदि ये बात पहले पता होती तो कभी नारद मुनि के नाम की सलाह नहीं देते।

नारद मुनि ने ब्रम्हा जी को नमस्कार करके केस की पैरवी शुरू की। नारद ने कहा की श्री गणेश धरती पर उनके नाम से किये जाने वाले अत्यचार से काफी आहात है। सरकारी वकील ने इस बात पर तुरंत ऑब्जेक्शन लेते हुए कहा की माय लार्ड धरतीवासी तो श्री गणेश की कृपा पाने के लिए उनकी पूजा अर्चना करते है और भगवानो के आर्टिकल १६ अ (१) के अनुसार हर कार्य से पहले श्री गणेश की पूजा करना अनिवार्य है। ​इसलिए श्री गणेश की इस याचिका ​में कोई दम  नहीं है। धरती पर मानव हमारे अनुक्षेद के हिसाब से कुछ भी गलत नहीं कर ​रहे है।


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अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नए व्यंग के साथ।
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