​पुरानीबस्ती पर प्रकाशित सभी ख़बरें सिर्फ अफवाह हैं, किसी भी कुत्ते और बिल्ली से इसका संबंध मात्र एक संयोग माना जाएगा। इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। इसे लिखते समय किसी भी उड़ते हुए पंक्षी को बीट करने से नहीं रोका गया है। यह मजाक है और किसी को आहत करना इसका मकसद नहीं है। यदि आप यहाँ प्रकाशित किसी लेख/व्यंग्य/ख़बर/कविता से आहत होते हैं तो इसे अपने ट्विटर & फेसबुक अकाउंट पर शेयर करें और अन्य लोगों को भी आहत होने का मौका दें।

महिला सशक्तिकरण

प्रधानसाहब पिछले साल वाला चुनाव न लड़ सके क्योंकि उस सीट को महिलाओ के लिए आरक्षित कर दिया गया था। परन्तु बिना चुनाव लड़े भी वो अगले पांच साल के लिए गांव के प्रधान है। हर सरकारी मीटिंग में वो ही सिरकत करते है वो भी प्रधान की हैसियत से। जी ज्यादा सोचिए मत आप और यदि आप हमारे प्रधानसाहब वाली कला नहीं जानते तो हम बता देते है। महिलाओ के लिए आरक्षित सीट पर प्रधानसाहब ने अपनी श्रीमती को चुनवा लड़वा दिया, श्रीमती जी सिर्फ चुनाव का नामंकन भरने के लिए गई थी और चुनाव का प्रचार-प्रसार सब प्रधानसाहब ने खुद ही किया था। आज कल तो प्रधानसाहब सरकारी दस्तावेजो पर भी अपनी श्रीमती के नाम से खुद ही हस्ताक्षर कर देते। श्रीमती जी ख़ुशी-ख़ुशी अपनी चूल्हा-चाकी में व्यस्त है।

तब्बू को जानते है आप? उम्मीद करता हूँ जानते होंगे। चांदनी बार फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रिय पुरस्कार मिला था। प्रीती जिंठा को भी आप जानते होंगे जी हाल ही में वो काफी सुर्ख़ियो में थी। प्रीति ने भी कई फिल्मो में बहुत ही बढ़िया
रोल किया है। ऐसी कई अभिनेत्रियों के नाम मैं आपको गिना सकता हूँ जिन्होंने अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। रानी मुखर्जी का ब्लैक वाला किरदार तो याद होगा आपको ? इन सभी में एक बात सामान्य है कुछ उम्र के बाद इन्हे फिल्मो में यदा-कदा ही रोल मिले वही दूसरी तरफ सलमान, शाहरुख़ और आमिर खान जैसे कलाकार है जो ५० की उम्र के अरिब-करीब है आज भी फिल्मो में कॉलेज बॉय की भूमिका में नजर आते है। कुछ तो ऐसे भी जो अब अभिनय भी नहीं करपाते परन्तु टिके हुए है।

मुंबई लोकल में सफर करते वक्त कई बार मैंने देखा की सामने से जाती हुई लोकल की लड़कियों को बदमाश लड़के छेड़ते है। लोकल तो चल रही है तो छेड़ दिया तो कोई लड़की थोड़े ट्रेन की चेन खींचकर आपके डिब्बे में आकर मारेगी, तो ये मनचले बिंदास लड़कियों को छेड़ते है। बस में महिलाओ के साथ जान-बूझकर होने वाली धक्का-मुक्की तो आप रोज देख ही लेते होंगे। जी ये हाल सिर्फ मुंबई का नहीं लगभग-लगभग भारत के हर हिस्से का है। आप ने कभी किसी को नहीं छेड़ा परन्तु आपने रोका भी तो नहीं। कानूनी रूप से आप गुन्हेगार नहीं हो परन्तु नैतिक रूप से तो गुन्हेगार हो। श्री कृष्ण और गीता का ज्ञान याद करीए शायद कुछ नैतिकता का ध्यान हो जाये। द्रोपती महाभारत का कारण नहीं थी, द्रोपती का द्यूतसभा में हुआ अपमान महाभारत का कारण था।

महिला सशक्तिकरण पर बड़े-बड़े भाषण करने वाले नेताजी किस तरह महिलाओ को शक्ति प्रदान कर रहे है ए बात आप प्रधानसाहब वाली घटना से समझ गए होंगे। कुछ-कुछ यही हाल लोकसभा आरकक्षण का भी होगा। श्रीमती जी चुनाव लड़कर लोकसभा जाएँगी और नेताजी देश चलाएंगे। महिला सशक्तिकरणकी बात आने पर बढ़-चढ़ कर इस मुहीम में भाग लेने वाले सिनेमा जगत की कहानी आप पढ़ ही चुके है जहा ५० का बुढ्ढा जवान का रोल कर रहा है और ३५ की उम्रवाली अभिनेत्री परदे से नदारद है और साथ ही सिनेमा जगत महिलाओ के शोषण के लिए भी जाना जाता है। यदि सिर्फ सत्यमेव जयते कहने से कुछ बदलता तो कब का बदल जाता। कुछ नहीं बदला इसका मतलब आपने कोशिश पूरी नहीं की थी। आप और हम अपनी सोच बदलने के साथ जब कुछ कार्य भी करेंगे तब जाकर सही मायने में महिला सशक्तिकरण होगा।

चलते-चलते दुष्यंत साहब की एक शायरी आपके लिए छोड़ जाता हूँ।
"कौन कहता है की आसमान में सुराख़ नहीं हो सकता, एक पत्थर  तो तबियत से उछालो यारो।"

अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नए व्यंग के साथ।
आप अपनी राय और सुझाव हमें नीचे टिप्पणी में लिख सकते है।

2 टिप्‍पणियां: