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#कविता - बारिस को पैगाम

सोचा बारिस के नाम कुच्छ लिख दू !
उसे एक पैगाम लिख दू !!

क्यों तू बरस के थम जाती है !
ना थमे तो कहर ढाती है !!

तुझसे मोह मुझे बड़ा गहरा है !
तेरे थम थम के बरसने से चमकता चेहरा है !!

तूने कई जीवनों को महकाया !
पर तेरी आफत ने कई जीवनों को जलाया !

तू ना बरसे तो मै तड़पता हु !
तेरे बरसने पर भी मै तड़पता हु !!

सोचा बारिस के नाम कुच्छ लिख दू !
उसे एक पैगाम लिख दू !!

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