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सचिन कौन है?

पुरानी बस्ती के एक छोटे से गांव की ए घटना है। गांव का नाम है तिसकुपुर। इस गांव के सभी लोग आदिवासी है। यहाँ बिजली सिर्फ छोटी बच्चियों के नाम में मिलती है। गांव मे भुखमरी और गरीबी लोगो कि जान ले लेती है। आज मैं जिस घटना का जिक्र कर रहा हू वो यहां के एक सरकारी विद्यालय की है । सुबह-सुबह स्कुल के चालु होते ही हड़कंप मच गया। तिसकुपुर सरकारी विद्यालय दो कमरो का विद्यालय है। इन दो कमरो मे विद्यालय के शिक्षक पहली से सातवी कक्षा कि क्लास लेते है। प्रधानाध्यापक को मिलाकर कुल तीन शिक्षक है।प्रधानाध्यापक का काम स्कुल कि देखरेख करना है तो वो पढ़ाने का काम नही करते है। दो कमरो का विद्यालय और पढ़ाने के लिए दो शिक्षक सभी विद्यार्थियों को पढ़ाते है।

आज स्कूल मे हड़कंप इसलिए मचा है क्योंकि शहर से बड़े साहब विद्यालय की व्यवस्था देखने आ रहे है। पाँच साल पहले जब बड़े साहब आए थे तो उन्होंने सभी को खुब डांट पिलाई थी। प्रधानाध्यापक तो उस बार छुट्टीपर थे तो बच गए पर इस बार उनकी भी खैर नही है। विद्यालय के शुरु होते ही सभी बच्चों को कमरों की सफाई के काम मे लगा दिया गया । घंटे भर मे विद्यालय और उसके प्रांगण की सफाई हो गई। शिक्षक और बच्चे चुपचाप बड़े साहब का इंतजार कर रहे थे । अचानक जीप के आने की आवाज कानो मे पड़ी, जीप की आवाज से ही प्रधानाध्यापक जी कांप गए। बड़े साहब के आते ही सभी शिक्षकों और विद्यार्थीयों ने उन्हें नमस्कार किया । प्रधानाध्यापक झटपट खाने पीने की व्यवस्था मे जुट गए। खाने पीने के इतने पकवान तो उन्होंने अपनी शादी मे भी नहीं देखे थे, परंतु बड़े साहब को खुश करने के लिए ए सब जरूरी था।

बड़े साहब खा पिकर निपटे तो कहा चलो छात्रों से मिल लेते है। प्रधानाध्यापक ने उन्हें टालने की कोशिश बहुत की परंतु बड़े साहब जिद पर अड़ गए की नहीं विद्यार्थीयों से जरुर मिलूंगा। कोई रास्ता ना देख प्रधानाध्यापक को तैयार होना ही पड़ा। प्रधानाध्यापक बड़े साहब को कक्षा मे ले गए । बड़े साहब के आते ही सभी विद्यार्थीयों ने उन्हें फिर से नमस्कार किया । बड़े साहब ने बारी-बारी से सभी छात्रों को अपना नाम बताने को कहा। छात्रों का नाम बताने कि सिलसिला चल ही रहा था कि बड़े साहब ने एक बच्चे से पुछा,"सचिन कौन है?" कक्षा के अंदर सन्नाटा पसर गया। सभी की चुप्पी को तोड़ते हुए बड़े साहब ने दुसरे बच्चे से फिर सवाल किया ,"सचिन कौन है?" दुसरा बच्चा थोड़ा घबराया परंतु उसने जवाब दिया,"बड़े साहब मैं आज विद्यालय देरी से आया, मैंने आने के बाद सचिन के बारे में कुछ नही सुना।"

प्रधानाध्यापक ने बड़े साहब को टोकते हुए कहा,"आपका पान आ गया है। बड़े साहब ने पान लेकर मुँह मे दबाया और फिर से वही सवाल,"सचिन कौन है?" एक बच्चे की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने उत्तर देने के लिए कहा। बच्चे ने तुरंत कहा बड़े साहब मैं तो आज चार महिने बाद विद्यालय आया हू, प्रधानाध्यापक जी ने मेरे हिस्से की पुस्तकें , चावल, गेहूँ सब पासवाले दुकानदार को बेच दिया, इसलिए मै अब विद्यालय नही आता हूँ। प्रधानाध्यापक घुड़कते हुए बच्चे को बैठने को कहा। बड़े साहब आगे बढे और फिर से वही सवाल,"सचिन कौन है?" बड़े साहब गुस्से से लाल हो रहे थे। कक्षा मे किसी छात्रा के पास जवाब नही था। इतने मे प्रधानाध्यापक को इशारा करते हुए एक शिक्षक हाथ मे रजिस्टर लेकर हाजिर हुए। गुरुजी ने कहा बड़े साहब, सचिन तो तीन साल पहले ही विद्यालय छोड़कर चला गया। और एक सचिन ने पिछले साल दाखला लिया था परंतु वो कभी विद्यालय नही आया। आप को कौन सा सचिन चाहिए?

बड़े साहब और आग बबुला हुए। उन्होने एक गिलास पानी पीया और अपने आपको संभाला। उन्होंने कहा कितने शर्म की बात है कि आप लोगों को ए नही पता,"सचिन कौन है?" इस बार बड़े साहब का गला भारी लग रहा था उनकी आँखें भरी हुई थी। बड़े साहब ने कहा सचिन पुरानी बस्ती का एक होनहार, शौर्य वीर सपुत था। सरहद पे एक दिन उसने अकेले सोलह दुश्मनो को मार गिराया और फिर अपने देश के लिए शहिद हो गया। दु:ख की बात है ऐसे कई सचिन भारत माता के लिए कुर्बान हो जाते है। समाचार मे उन्हे कही एक पन्ने पर अंक के रुप मे लिख दिया जाता है, सुरक्षा मंत्रलाय भी कुछ अधिक नही करता है। उससे बड़ा दु:ख ए है, कि छोटी छोटी बात पर एक दुसरे को मरने-मारनेवाले भी सचिन को नही जानते है। इंसान को भगवान बनाने वाले लोगो हमारे सचिन की मौत पर खून नहीं खौलता क्योंकि उनके लिए ये आम बात है।

क्या आप जानते है,"सचिन कौन है?"


अगले सोमवार फिर मिलेंगे एक नए व्यंग के साथ। 

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