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अल्हा छुट्टियों पर है।

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आजकल मुसलिम देशों मे हर दिन एक नया संकट उभर रहा है। मुसलिम देशो का हाल कुछ-कुछ उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार के जैसा हो गया है। जिस तरह उत्तर प्रदेश में रोज एक के बाद एक बलात्कार हो रहे है उसी तरह मुसलिम देशो में हर आये दिन युद्ध हो रहा है। ट्विटर पर अंग्रेजों के देवता ने कह दिया कि मुसलिम देशों की देखभाल करना उनके बस मे नहीं है और ना ही ए उनके अधिकार क्षेत्र मे है। अंग्रेजों के देवता के खुद के राज्य में इतनी परेशानिया है की उन्हें रोज कई चक्कर तो मानवधिकार न्यायलय के लगाने पड़ते है। जिस की विश काबुल न करो वो ही एक मुकदमा ठोक देता है।

हिन्दूओ के भगवान को तो भारत से ही फुरसत नही है। भारत में प्रतिदिन धर्म के नाम पर इतनी समस्याओ का समाधान करते करते वो थक जाते है। उसमे से तो कई केस ऐसे होते जिसके लिए उन्हें मुसलमान और ईसाई थानो मे चक्कर लगाने पड़ते है। और यदि गलती से कुछ समय बच गया तो उन्हें उसे उत्तर प्रदेश के व्यवस्था के तरफ लगाना पड़ता है, नहीं तो उसका हाल और बदत्तर हो जायेगा। उत्तर प्रदेश को छोड़कर भी यदि भारत में गरीबी और भुकमरी का आलम देखे तो यह ज्ञात होगा को भगवान को जल्द से जल्द प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को १००% तक बढ़ाना पड़ेगा ताकि वो भुकमरी और गरीबी को हटा सके।

संसार मे कई और छोटे - बड़े धर्मो के भगवान है, परंतु कोई भी अपने सीमा क्षेत्र के बाहर जाकर काम नहीं करना चाहत है। सुना है पिछलीबार एक छोटे धर्म के देवता ने मुसलिम देश के किसी मामले मे नाक घुसा दि, परंतु उसके बाद छोटे देवता को बहुत दु:ख झेलना पड़ा। सभी धर्मो के भगवान ने उस देवता को देश निकाला दे दिया और उसके भक्तो को मिलकर बाँट लिया। बात सही भी है यदि मेरे भक्तो की मदत कोई और देवता करेगा तो मेरी इज्जत कहा होगी। सभी देवता अपने अपने कोटे के अनुसार अपने भक्तो की मदत करते है। और बाकि तो मार पिट के खेल और हिंसा की कहानियो में हम इंसानो को बहुत मजा आता है तो भगवान इस मजे से क्यों वंचित रहे।

अकसर पैसे वाले अमिर लोग गरमियों के शुरु होते ही छुट्टियों पर चले जाते हैं। कोई आसपास के हिल स्टेशन पर चला जाता है, तो कोई विदेश यात्रा पर चला जाता है। अमरीका सभी की पसंदीदा जगह है। सबसे बड़े और ताकवर देवता अमेरिका में ही रहते है तो वहा पर सुख सुविधाओ की व्यवस्था अन्य भगवान के क्षेत्रो से काफी बढ़िया है। आप यदि विदेश चलेजाते है और आपके यहां कुछ दुर्घटना घटती है तो भी आप कई परेशानियों के चलते जल्दी से घर नहीं लौट पाते हैं। ऊपर से टिकट रद्द करवाके नए टिकट बनाने का खर्चा बहुत महंगा पड़ता है। कुछ यही हाल देवताओ का भी है जो आज कल छुट्टी पर है और छुट्टियों की बीच से लौटना नहीं चाहते है।

अल्हा भी रोजे के दिनों मे लगता है छुट्टियों पर है। धर्म के नाम पर रोज कई हजार लोग मार दिए जा रहे हैं। जन्म तो ले लिया परन्तु मानव नही बन पाए। प्रार्थना करूँगा की अल्हाजी छुट्टीयो से जल्दी आ जाए, यदि सेवक ही नहीं बचेंगे तो अल्हाजी का राज्य भी नहीं बचेगा और मै इस बात को जानता हूँ की कोई भी अपने राज्य को यूही अपने हाथो से जाने नहीं देगा। मैं बाकी सभी धर्म के देवताओं से आग्रह करुंगा की अल्हा जी के आने तक वो उनके सेवकों की रक्षा करे, अल्हा जी भी आपकी अनुपस्तथि मे आपके सेवकों की रक्षा करेंगे। यही समय है की आप सभी धर्मो के देवता अपने सीमा क्षेत्र के परे होकर मानवता की रक्षा के लिए एक जूट हो जाएं और "मानवता धर्म की स्थपना करे।"

ध्यान दे : इस लेख द्वारा लेखक ने सभी देशों द्वारा की जानेवाली राजनीती पर व्यंग किया गया है, इस लेख से हम किसी भी धर्म का अपमान नहीं कर रहे है और न ही किसी धर्म अनुयायी को आहत करना चाहते है। इस लेख को समझने के लिए आपको इस लेख के यथाशब्दो से परे जाना होगा। यदि आप इस लेख को नहीं समझ पाए तो हम आपसे क्षमा मंगाते है। कृपया इस लेख को किसी धर्म के सम्मान और अपमान से न जोड़े।