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#कविता - बादल आज कई दिनों के बाद रोया

दूर गगन में कही था अब तक खोया,
बादल आज कई दिनों के बाद रोया,
बदल रोता, मै मुस्कुराता हूँ,
वो गम बताता, मै खुशिया मनाता हूँ,
बादल के आंसू ने सारा जग भिगोया,
बादल आज कई दिनों के बाद रोया I

अब बादल रोता मै हँसता नहीं था,
उसके आंसू पर मज़ा कसता नहीं था,
बदल के आंसू ने हरियाली का मंजर लाया,
सपनो सा था दर्पण, जग को आंसू ने चमकाया,
बादल ने जैसे रोने की जिद थी ठानी,
उसके आंसू धरती पर कर रहे थे मनमानी I

अब बादल रोता तो मै भी रोता  हूँ,
अपने सपने उसके आंसू से भिगोता हूँ,
हरियाली का मंजर जैसे उजड़ा, कही खोया,
बादल आज कई दिनों के बाद रोया I

कुछ महीने बीते बादल मान गया,
अपने आंसू को थामना जैसे जान गया,
अब बदल मुस्कुराता, मै मुस्कुराता हूँ,
रोने पर किसी के न हँसना सबको समझाता हूँ,
दूर गगन में कही था अब तक खोया,
बादल आज कई दिनों के बाद रोया I


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​इस कविता से मैं ये बताना चाहता हूँ कि ​कैसे इंसान अपनो और दूसरे के दुःख में शामिल होता है I दुःख वही होते है परंतु जब अपने ऊपर पड़ती है तो लोग महसूस करते है। ​

टिप्पणियाँ

  1. क्या बात...क्या बात...क्या बात...

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  2. बहुत खूबसूरती से व्यक्त किया भावों को इस कविता के माध्यम से। आप की लेखनी दिन बी दिन निखर कर उबर रही है। कुछ ऐसे लम्हों की याद आ गयी पढ़ कर जीने हम सारी ज़िन्दगी के लिए संजो कर रखना चाहते हैं और कविता से अच्छा माध्यम क्या होगा। 🙏👌

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